गोरखपुर: 17 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल भूमि सुधार और किसानों के बिखरे हुए खेतों को एक स्थान पर संयोजित करने की चकबंदी प्रक्रिया ने गोरखपुर जनपद में गति पकड़ ली है। मंगलवार को जिलाधिकारी सभागार में उप संचालक चकबंदी दशरथ कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान जनपद के 58 गांवों में चल रही चकबंदी समीक्षा की वर्तमान स्थिति, कानूनी अड़चनों और किसानों की आपत्तियों के निस्तारण पर गहन मंथन किया गया। अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम: 58 गांवों में प्रक्रिया जारी
उप संचालक चकबंदी दशरथ कुमार ने बैठक में प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि वर्तमान में गोरखपुर के विभिन्न तहसीलों के 58 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है।
- सफलता: अब तक चार गांवों में चकबंदी समीक्षा का कार्य पूर्णतः संपन्न कर लिया गया है।
- चक कटान: नौ गांवों में चक कटान (Plot Allotment) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
- आगामी लक्ष्य: उप संचालक ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मार्च माह के अंत तक कम से कम 15 गांवों में चक कटान की प्रक्रिया हर हाल में पूर्ण कर ली जाए।
पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर
बैठक में दशरथ कुमार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चकबंदी का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि का ऐसा पुनर्विन्यास प्रदान करना है जिससे उनकी कृषि लागत कम हो और उत्पादन बढ़े। उन्होंने कहा कि अक्सर चकबंदी समीक्षा के दौरान भ्रष्टाचार और पक्षपात की शिकायतें आती हैं, जिन्हें रोकने के लिए ‘पारदर्शी’ कार्यप्रणाली अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्व अभिलेखों का मिलान मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन के साथ किया जाए।
किसानों की आपत्तियों का त्वरित निस्तारण
किसानों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए बैठक में निर्णय लिया गया कि चकबंदी के दौरान प्राप्त होने वाली आपत्तियों को लंबित न रखा जाए। दशरथ कुमार ने कहा, “किसानों की आपत्तियों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए। यदि किसान संतुष्ट नहीं होगा, तो योजना का मूल उद्देश्य विफल हो जाएगा।” अधिकारियों को गांवों का नियमित भ्रमण करने और वास्तविक स्थिति का आकलन करने को कहा गया है ताकि किसी भी विवाद को ग्राम स्तर पर ही सुलझाया जा सके।

न्यायिक और प्रशासनिक तालमेल
बैठक में बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी (प्रशासन) धर्मेंद्र मिश्रा ने विभिन्न गांवों की ब्लॉक-वार प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि विभागीय टीमें निरंतर क्षेत्र में सक्रिय हैं और मानचित्रों के संशोधन का कार्य तेजी से चल रहा है। वहीं, बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी (न्यायिक) हरिवंश मिश्रा ने लंबित न्यायिक प्रकरणों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चकबंदी न्यायालयों में चल रहे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है ताकि चक वितरण की प्रक्रिया बाधित न हो।
आधुनिक तकनीक का उपयोग
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि चकबंदी कार्यों में आधुनिक सर्वेक्षण उपकरणों और जीआईएस (GIS) मैपिंग का उपयोग बढ़ाया जाए। इससे सीमा विवाद की संभावनाएं कम होंगी और भविष्य में डिजिटल खतौनी तैयार करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों से कहा गया कि वे लेखपालों और कानूनगो के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें।
लापरवाह अधिकारियों को चेतावनी
उप संचालक चकबंदी ने समीक्षा के दौरान पाया कि कुछ क्षेत्रों में कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने संबंधित सहायक चकबंदी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, तो उनकी जवाबदेही तय की जाएगी और विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और दोषमुक्त चकबंदी शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उपस्थित अधिकारी
समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी (प्रशासन) धर्मेंद्र मिश्रा, बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी (न्यायिक) हरिवंश मिश्रा, जनपद के समस्त चकबंदी अधिकारी एवं सहायक चकबंदी अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में आश्वस्त किया कि मार्च तक निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण कर लिया जाएगा।
निष्कर्ष
गोरखपुर में संचालित चकबंदी प्रक्रिया यदि इसी सक्रियता के साथ आगे बढ़ती है, तो आगामी कुछ महीनों में हजारों किसानों को उनकी अपनी सुव्यवस्थित जमीन मिल सकेगी। बिखरे हुए खेतों का एक चक होने से न केवल सिंचाई में सुविधा होगी, बल्कि किसानों के बीच होने वाले छोटे-मोटे विवादों का भी अंत होगा। जिलाधिकारी सभागार में हुई यह बैठक किसानों के लिए न्याय और प्रगति का नया सवेरा लेकर आने वाली साबित होगी।













