यह रिपोर्ट बृजनाथ तिवारी की लिखी हुई है
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की चिलुआताल थाना पुलिस ने एक बेहद हाई-टेक और संगठित अपराध का खुलासा करते हुए अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी (Cyber Fraud) करने वाले गिरोह को दबोचा है। यह गिरोह चिलुआताल क्षेत्र के एक तीन मंजिला मकान में कॉल सेंटर की आड़ में अमेरिका जैसे देशों के नागरिकों को अपना निशाना बना रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान मौके से 5 युवकों और 1 युवती को गिरफ्तार किया है।
इस गिरोह की कार्यप्रणाली इतनी शातिर थी कि वे सात समंदर पार बैठे लोगों को भारतीय जमीन से फर्जी नामों के जरिए ठग रहे थे। पुलिस ने इस कार्रवाई को जिले में डिजिटल अपराधों के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक बताया है।

फर्जी कॉल सेंटर और ठगी का ‘मॉडस ऑपेरंडी’
पुलिस की जांच में सामने आया कि पकड़े गए अभियुक्तों ने चिलुआताल में एक किराए के मकान को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया था। इस साइबर ठगी (Cyber Fraud) के खेल को अंजाम देने के लिए गिरोह के सदस्य ई-मेल और डार्क वेब के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों का डेटा हासिल करते थे।
ठगी का तरीका:
- फर्जी पहचान: कॉल सेंटर में काम करने वाले एजेंट अपना नाम जॉन, जॉर्ज या लेविस जैसे अंग्रेजी नाम बताते थे ताकि विदेशी नागरिकों को कोई संदेह न हो।
- झांसा देना: ये एजेंट अमेरिकी नागरिकों को टैक्स रिफंड, बीमा पॉलिसी या सरकारी सब्सिडी दिलाने का लालच देते थे।
- अमेरिका से कनेक्शन: जैसे ही कोई नागरिक इनके झांसे में आता, कॉल को अमेरिका में स्थित इनके सहयोगियों को फॉरवर्ड कर दिया जाता था, जहाँ ‘क्लोजिंग’ के जरिए वित्तीय ठगी की जाती थी।
- कमीशन का खेल: ठगी गई राशि का एक निश्चित हिस्सा गोरखपुर में बैठे इन एजेंटों को मिलता था।
बरामदगी और गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण

पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं, जो इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होने की पुष्टि करते हैं।
- बरामद सामग्री: 28 लैपटॉप, 37 हेडफोन, 2 राउटर, कई स्मार्टफोन और महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज।
- गिरफ्तार अभियुक्त: रूपेश सिंह, अभिषेक पाण्डेय, हर्ष आर्या, सूरज कुमार तिवारी, अश्वनी कुमार मौर्या और शलोनी यादव।
हैरानी की बात यह है कि गिरोह के सरगना रूपेश सिंह और अभिषेक पाण्डेय का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। वे पूर्व में लखनऊ के विभूतिखंड थाने से भी साइबर ठगी के मामले में जेल जा चुके हैं।
विधिक कार्रवाई और धाराओं का शिकंजा
थाना चिलुआताल में अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा संख्या 36/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है:
- BNS धारा 319(2), 318(4): धोखाधड़ी और प्रतिरूपण से जुड़े अपराध।
- धारा 66D IT Act: कंप्यूटर संसाधनों के माध्यम से छल करना।
क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज के नेतृत्व में पुलिस अब इस गिरोह के फरार चार अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।
निष्कर्ष: डिजिटल युग की नई चुनौतियां
गोरखपुर में इस स्तर पर साइबर ठगी (Cyber Fraud) के कॉल सेंटर का चलना पुलिस के लिए सतर्कता का विषय है। यह घटना दर्शाती है कि अपराधी अब तकनीक का उपयोग कर भौगोलिक सीमाओं को पार कर रहे हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल सेंटर या अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दें। फिलहाल, पकड़े गए सभी अभियुक्तों को जेल भेजने की प्रक्रिया जारी है और उनके बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्यवाही भी की जा रही है।
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