बेंगलुरु/नई दिल्ली: 11 फरवरी 2026
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता और गगनयान मिशन की तैयारियों के बीच भारत ने अब अंतरिक्ष में अपनी ‘स्थायी बस्ती’ बसाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS) के निर्माण के लिए मिशन मोड में काम शुरू कर दिया है। हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में अंतरिक्ष विभाग को 13,705.60 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आवंटन इसी महत्वाकांक्षी सपने को हकीकत में बदलने की एक बड़ी कड़ी है।
2028 में लॉन्च होगा पहला मॉड्यूल (BAS-01)
इसरो की योजना के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल, जिसे BAS-01 नाम दिया गया है, वर्ष 2028 तक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया जाएगा। जनवरी 2026 में इसरो ने इस मॉड्यूल के निर्माण के लिए भारतीय एयरोस्पेस और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) आमंत्रित किए हैं। इस निविदा को जमा करने की अंतिम तिथि 8 मार्च 2026 रखी गई है।+2
खास बात यह है कि इसरो ने स्पष्ट कर दिया है कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से स्वदेशी होगा। इसमें किसी भी विदेशी एजेंसी की भागीदारी नहीं ली जाएगी, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प और मजबूत होगा।

कैसा होगा भारत का अपना स्पेस स्टेशन?
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को पृथ्वी से लगभग 400-450 किलोमीटर की ऊँचाई पर ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ (LEO) में स्थापित किया जाएगा। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- वजन और आकार: स्टेशन का कुल वजन लगभग 52 टन होगा।
- मॉड्यूलर डिजाइन: यह पाँच अलग-अलग मॉड्यूलों से मिलकर बनेगा, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से अंतरिक्ष में ले जाकर जोड़ा जाएगा।
- क्षमता: इसमें एक समय में 3 से 4 अंतरिक्ष यात्री रह सकेंगे।
- उद्देश्य: यहाँ सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Micro-gravity) अनुसंधान, जीव विज्ञान, पदार्थ विज्ञान और भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए ‘ट्रांजिट हब’ के रूप में काम किया जाएगा।
बजट 2026: अंतरिक्ष सपनों को मिली नई ऊर्जा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए 10,397 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं। इस धनराशि का एक बड़ा हिस्सा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के विकास और अगली पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल (NGLV) बनाने में खर्च किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2035 तक भारत के पास एक पूरी तरह से ऑपरेशनल स्पेस स्टेशन हो।+1

रूस के साथ ‘स्पेस याराना’
एक दिलचस्प अपडेट यह भी है कि भारत और रूस अपने नए अंतरिक्ष स्टेशनों को एक ही कक्षा (51.6° ऑर्बिट) में रखने पर विचार कर रहे हैं। इससे भविष्य में दोनों देशों के अंतरिक्ष यात्री आसानी से एक-दूसरे के स्टेशन पर आ-जा सकेंगे, जो अंतरिक्ष कूटनीति में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
गगनयान से BAS तक का सफर
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की सफलता काफी हद तक ‘गगनयान’ मिशन पर निर्भर है। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका लक्ष्य 2027 में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में भेजना और सुरक्षित वापस लाना है। गगनयान के ठीक बाद BAS-01 की लॉन्चिंग भारत को उन चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन) की कतार में खड़ा कर देगी जिनके पास अंतरिक्ष में अपना स्थायी ठिकाना है।+1
चुनौतियां और भविष्य का विजन
अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण कोई आसान काम नहीं है। इसमें 0.5 मिलीमीटर की तकनीकी गलती भी पूरे मिशन को खतरे में डाल सकती है। इसीलिए इसरो उच्च शक्ति वाले एल्युमिनियम मिश्र धातु (AA-2219) और अत्यधिक उन्नत ‘ह्यूमन-रेटेड’ मानकों का उपयोग कर रहा है। पीएम मोदी का विजन स्पष्ट है: 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय मानव को उतारना।
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