बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 18 March 2026

उत्तर प्रदेश के जनपद गोरखपुर के दक्षिणांचल स्थित गोला तहसील का ऐतिहासिक और सुप्रसिद्ध देवी धाम बारानगर बीरकालिका माता इन दिनों चैत्र नवरात्र की पूर्व संध्या पर भक्ति के रंग में सराबोर है। सरयू नदी के पावन तट पर स्थित माँ कालिका का यह दरबार न केवल स्थानीय ग्रामीणों, बल्कि पड़ोसी जिलों के श्रद्धालुओं के लिए भी अटूट विश्वास का केंद्र बन चुका है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्ची श्रद्धा के साथ माथा टेकता है, माँ उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं। बारानगर बीरकालिका माता मंदिर 2026 की रौनक और यहाँ गूँजते घंटों की ध्वनि पूरे वातावरण को दिव्य बना रही है।
उत्पत्ति की कथा: सरयू की लहरों से प्रकट हुआ दिव्य पिंड
तहसील मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित बारानगर गाँव का इतिहास माँ कालिका की कृपा से जुड़ा है। स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, सदियों पहले सरयू नदी में एक दिव्य पिंड बहता हुआ दिखाई दिया था।
- नाविकों की भक्ति: गाँव के मल्लाहों ने उस पिंड को नदी से निकालकर गाँव में स्थापित किया।
- दिव्य स्वप्न: कहा जाता है कि पिंड स्थापना के बाद नाविकों को नदी पार करने में कठिनाई होने लगी। तब गाँव के शिवमंगल मल्लाह को माता ने स्वप्न में दर्शन दिए और निर्जन स्थान पर स्थापित करने की इच्छा जताई।
- चमत्कार: माता की आज्ञानुसार पिंड को जंगल में स्थापित किया गया, जिसके बाद सरयू नदी स्वयं अपना मार्ग बदलकर माता के चरणों के पास से बहने लगीं। आज भी मल्लाह जाति के लोग ही माता की सेवा और मंदिर की देखरेख करते हैं।
फलाहारी संत बाबा बोधी दास की तपस्थली
एक समय यह स्थान घने जंगलों से घिरा था। इसी निर्जन स्थान पर संत बाबा बोधी दास जी ने आकर घोर तपस्या की। उनकी मेहनत और भक्ति के कारण ही यह स्थान एक रमणीक स्थल के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने यहाँ हनुमान मंदिर और धर्मशाला का निर्माण कराया। आज भी उनकी समाधि यहाँ आने वाले भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र है।
नवरात्र और रविवार: उमड़ता है जन सैलाब
बारानगर बीरकालिका माता मंदिर 2026 के विशेष अवसर पर यहाँ भक्तों का रेला लगा रहता है। विशेष रूप से नवरात्र के नौ दिनों और प्रत्येक रविवार को यहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती।
- धार्मिक अनुष्ठान: दूर-दूर से लोग यहाँ बच्चों का मुंडन संस्कार, सत्यनारायण कथा और ‘कड़ाही’ (प्रसाद चढ़ाना) जैसे अनुष्ठान करने आते हैं।
- आध्यात्मिक वातावरण: मंदिर परिसर में निरंतर बजने वाले घंटों और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहता है।
- पर्यटन स्थल: सरयू नदी के किनारे स्थित होने के कारण यह एक सुंदर पिकनिक और पर्यटन स्थल के रूप में भी उभरा है।
प्रशासनिक उपेक्षा: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
भक्तों की भारी भीड़ और जन आस्था के बावजूद, स्थानीय प्रशासन की भूमिका यहाँ उदासीन बनी हुई है। ग्रामीणों और मंदिर समिति का आरोप है कि नवरात्र और रविवार जैसे महत्वपूर्ण दिनों में यहाँ पुलिस बल की तैनाती नहीं की जाती, जिससे उमड़ते जनसैलाब को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।












