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सूर्य के उत्तरायण का संदेश: केवल शरीर नहीं, अब आत्मा को जगाने का समय!

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लेखक सर्वेदु कृष्ण गोलाबाजार, गोरखपुर में रहते हैं और उनका लेख 14 जनवरी को प्रकाशित हुआ था।

मकर संक्रांति

विवेक और उत्तरदायित्व से आती है जागरण की परंपरा

  • मकर संक्रांति का पर्व हमारे जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में आता है, तो यह न केवल आकाश में स्थिति बदलता है, बल्कि हमारे जीवन को भी बदल देता है।
  • उत्तरायण का समय प्रकृति के निष्क्रियता से सक्रियता की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण समय है, जो हमें डर से भरोसे की दिशा में ले जाता है और उदासी से आशा की ओर आगे बढ़ाता है।
  • सर्दियों की ठंड में सूर्य की पहली उत्तरायणी किरण हमें यह विश्वास दिलाती है कि चाहे जितना भी अंधकार हो, उजाला वापस आना ही आना है। दिवाली जैसे पर्व हमें नई आशा और उत्साह से भर देते हैं।

लोकमानस में पतंगें, तिल, खिचड़ी और उत्सव जीवन के गहरे अर्थों को समझाने वाले प्रतीक बन जाते हैं और हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं। आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें हमें सिखाती हैं कि जीवन में आने वाली तेज़ हवाएं और चुनौतियाँ हमें निराश नहीं करेंगी, बल्कि अगर हम अपने जीवन में संतुलन बनाए रखें तो वे हमें और भी आगे बढ़ाने में मदद करेंगी।

आकाश में पतंगें उड़ती हैं और यह दृश्य हमें जीवन की एक महत्वपूर्ण बात सिखाता है। हमें अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखना होगा, लेकिन साथ ही अपने आसपास के लोगों और पर्यावरण के साथ भी संतुलन बनाना होगा। जब हम पतंग उड़ाते हैं, तो हमें डोर को संभालना होता है और साथ ही आकाश में पतंग की उड़ान का आनंद लेना होता है। यही जीवन का सही तरीका है – हमें अपने लक्ष्यों को पाने के लिए मेहनत करनी होगी, लेकिन साथ ही जीवन के छोटे-छोटे पलों का आनंद भी लेना होगा। इससे हम जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकते हैं और उन पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

Conclusion:

शिशिर को हाशिए पर धकेलने की सूर्य की ताकत अब शुरू हो गई है। हवा में एक अनोखा बदलाव है, जो दिखाई नहीं देता लेकिन महसूस किया जा सकता है। बसंत अभी तक नहीं आए हैं, लेकिन उनके आने की आहट सुनाई दे रही है। उनके आने का इंतजार करने के लिए कैलेंडर की जरूरत नहीं है, बस हाथ की उंगलियों के पोर ही काफी हैं।

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