गोरखपुर में पूर्व में समायोजित प्रथम और द्वितीय बैच के शिक्षामित्रों के लिए राहत भरी खबर है। जीआईसी (बीमा) मद में काटी गई धनराशि की वापसी को लेकर विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। वित्त एवं लेखाधिकारी के हस्ताक्षर के बाद भुगतान बिल ट्रेजरी में जमा करा दिया गया है।
गोरखपुर। जिले के शिक्षामित्रों की लंबे समय से लंबित जीआईसी (बीमा) कटौती की धनराशि वापस मिलने की उम्मीद अब मजबूत हो गई है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की जिला इकाई की पहल पर इस मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई तेज हुई है। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को जिलाध्यक्ष राम नगीना निषाद के नेतृत्व में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) से मुलाकात कर भुगतान का मुद्दा उठाया और ज्ञापन सौंपा।

संघ ने ज्ञापन के माध्यम से पूर्व में समायोजित शिक्षामित्रों के प्रथम बैच की प्रति व्यक्ति 3,132 रुपये और द्वितीय बैच की प्रति व्यक्ति 2,349 रुपये की जीआईसी मद में हुई कटौती वापस कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल की मांग पर बीएसए ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वित्त एवं लेखाधिकारी को आवश्यक भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।
हस्ताक्षर के बाद ट्रेजरी में जमा हुआ बिल
संगठन के पदाधिकारियों के लगातार प्रयासों के बाद जीआईसी मद की वापसी से संबंधित बिल पर वित्त एवं लेखाधिकारी के हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद बिल को ट्रेजरी में जमा करा दिया गया है। संघ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, विभागीय और कोषागार संबंधी प्रक्रिया समय से पूरी होने पर शुक्रवार या शनिवार तक संबंधित शिक्षामित्रों के बैंक खातों में धनराशि पहुंचने की संभावना है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग पर जताया आभार
भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, वित्त एवं लेखाधिकारी और संबंधित पटल सहायकों के प्रति आभार व्यक्त किया। संघ ने विशेष रूप से प्रेमचंद गुप्ता, अभिनव पाठक और अनिरुद्ध त्रिपाठी के सहयोग की सराहना की।
इस दौरान जिलाध्यक्ष राम नगीना निषाद, जिला महामंत्री राजनाथ यादव, पिपराइच ब्लॉक अध्यक्ष परीक्षित उपाध्याय, जिला संयुक्त मंत्री संतोष कुमार सिंह, गोपाल सिंह, अजय कुमार सिंह और लालधर निषाद समेत कई शिक्षामित्र मौजूद रहे।
शिक्षामित्रों की समस्याओं को लेकर संघर्ष जारी
संघ के जिला मीडिया प्रभारी रामानन्द ने बताया कि संगठन शिक्षामित्रों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए लगातार अधिकारियों से संपर्क कर रहा है। जीआईसी बीमा कटौती की वापसी की दिशा में हुई प्रगति से संबंधित शिक्षामित्रों को जल्द आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल बिल ट्रेजरी में जमा होने के बाद अब शिक्षामित्रों की निगाहें धनराशि उनके बैंक खातों में पहुंचने पर टिकी हैं।













