नई दिल्ली: 12 अप्रैल 2026

लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम एक सशक्त संदेश देते हुए देश की आधी आबादी के हक में बड़ी बात कही है। प्रधानमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने और इसके संशोधनों को पारित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील की है। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब देश की नारी शक्ति को सशक्त बनाने की बात हो, तो पूरे सदन और सभी राजनीतिक विचारधाराओं को ‘एक स्वर’ में बोलना चाहिए।
विधेयक की महत्ता और पीएम का विजन
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि महिला आरक्षण विधेयक केवल एक वैधानिक सुधार नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य की नींव है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” का संकल्प तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक हमारी माताएं, बहनें और बेटियां निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर की भागीदार न हों।
पीएम ने कहा, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से हम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं। यह समय का तकाजा है कि हम पुरानी बहसबाजियों को पीछे छोड़कर सर्वसम्मति से इस दिशा में आगे बढ़ें।”
विपक्ष और सहयोगियों से एकजुटता की अपील
राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए, प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से और सार्वजनिक रूप से यह अपील की कि संशोधनों को लेकर जो भी शंकाएं हैं, उन्हें स्वस्थ चर्चा के माध्यम से दूर किया जाए, लेकिन लक्ष्य महिला सशक्तिकरण ही होना चाहिए।
पीएम मोदी के संबोधन के मुख्य बिंदु:
- एकता का संदेश: प्रधानमंत्री ने कहा कि देश देख रहा है कि कौन सा दल नारी शक्ति के वास्तविक उत्थान के लिए खड़ा है।
- संशोधनों पर स्पष्टता: उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रस्तावित संशोधन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएंगे।
- ऐतिहासिक अवसर: पीएम ने इसे ‘ऐतिहासिक अवसर’ बताते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास महिलाओं को उनका उचित राजनीतिक स्थान दिलाने का सुनहरा मौका है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: क्या बदल जाएगा?
यह विधेयक लागू होने के बाद भारतीय राजनीति का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।
- प्रतिनिधित्व में वृद्धि: लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- नीति निर्माण में बदलाव: शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर महिला दृष्टिकोण को प्राथमिकता मिलेगी।
- जमीनी स्तर पर प्रभाव: पंचायत स्तर पर सफल रही महिला भागीदारी अब राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर देश का नेतृत्व करेगी।
सियासी हलकों में हलचल और प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री की इस भावनात्मक और रणनीतिक अपील के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कई महिला सांसदों और अधिकार समूहों ने प्रधानमंत्री के इस रुख का स्वागत किया है। हालांकि, कुछ दलों ने आरक्षण के भीतर ‘कोटा’ (OBC/SC/ST आरक्षण) की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है।
प्रधानमंत्री ने इन मांगों के संदर्भ में भी संकेत दिया कि सरकार सभी वर्गों के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन तकनीकी पेचदगियों के कारण एक महान क्रांतिकारी कदम को रोका नहीं जाना चाहिए।
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