बृजनाथ तिवारी
गोलाबाजार, गोरखपुर: 28 मार्च 2026

आध्यात्मिक ऊर्जा और लोक कल्याण की कामना के साथ गोरखपुर जनपद के गोला तहसील अंतर्गत पटौहा गांव स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय भव्य सतचंडी यज्ञ का समापन शुक्रवार, 27 मार्च को पूर्ण विधि-विधान और महाप्रसाद वितरण के साथ संपन्न हो गया। 19 मार्च से शुरू हुए इस धार्मिक अनुष्ठान ने चिलचिलाती धूप के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं होने दिया। यज्ञ की वेदी से निकलने वाली आहुतियों की सुगंध और वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ ने समूचे क्षेत्र के वातावरण को अलौकिक और भक्तिमय बना दिया।
वैदिक अनुष्ठान: आचार्य कामेश्वर शास्त्री का निर्देशन
इस महानुष्ठान को शास्त्रोक्त पद्धति से संपन्न कराने का उत्तरदायित्व प्रख्यात यज्ञ आचार्य कामेश्वर शास्त्री ने संभाला। उनके कुशल निर्देशन में विद्वान ब्राह्मणों की टोली ने प्रतिदिन अरणी मंथन, अग्नि स्थापना और विशेष पूजन संपन्न किए।
अनुष्ठान की सफलता में विद्वान विप्र ब्रजेश कुमार, पीयूष कुमार चौबे, बृजेश तिवारी और रामाशीष चौबे ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंत्रोच्चार की शुद्धता और कर्मकांड की बारीकियों ने यज्ञ स्थल पर उपस्थित हर श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा व्यास मानस मधुकर: रामकथा की अमृत वर्षा
यज्ञ के साथ-साथ प्रतिदिन अपराह्न काल में आयोजित प्रवचन सत्र मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। सुप्रसिद्ध कथावाचक मानस मधुकर कौशल किशोर महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से रामकथा और देवी भागवत के प्रसंगों की व्याख्या की।
कौशल किशोर महाराज ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यज्ञ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है। उनके द्वारा प्रस्तुत भजनों और मार्मिक प्रसंगों को सुनकर पांडाल में उपस्थित महिला और पुरुष श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। दूर-दराज के गांवों से आए भक्तों की भीड़ उनके मुखारविंद से ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने के लिए घंटों प्रतीक्षा करती दिखी।
यजमानों का समर्पण और सामाजिक सहयोग
किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता उसके पीछे खड़े समर्पित सेवकों पर निर्भर करती है। इस सतचंडी यज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में संदीप पाण्डेय, संतोष दुबे, अरविंद दुबे, रामप्रकाश दुबे व रमेश दुबे ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
यज्ञ समिति के सदस्यों ने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिदिन हजारों लोगों के लिए फलाहार और भोजन की व्यवस्था की गई थी। क्षेत्रीय युवाओं ने वालंटियर के रूप में ट्रैफिक नियंत्रण और दर्शनार्थियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा, जो सामाजिक एकता का उत्कृष्ट उदाहरण बना।
पूर्णाहुति: आस्था का शिखर और महाप्रसाद
27 मार्च को आयोजित पूर्णाहुति के दिन सुबह से ही पंचमुखी हनुमान मंदिर पर भक्तों का तांता लगा रहा। विशेष पूजा-अर्चना के बाद अग्नि देव को अंतिम आहुतियाँ समर्पित की गई।
- हवन पूजन: मुख्य कुंड पर यजमानों ने आचार्यों के सानिध्य में विश्व शांति और लोक कल्याण के लिए आहुतियाँ दीं।
- भंडारा: यज्ञ की समाप्ति के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ ‘प्रसाद’ ग्रहण करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। ‘जय श्री राम’ और ‘माँ भगवती’ के जयकारों से पूरा पटौहा क्षेत्र गुंजायमान रहा।
पटौहा का यह सतचंडी यज्ञ न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि इसने क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को नई मजबूती प्रदान की। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिलता है। पंचमुखी हनुमान जी की कृपा और श्रद्धालुओं के सहयोग से संपन्न यह यज्ञ आने वाले समय में क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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