उमेश मिश्रा
गोलाबाजार (गोरखपुर): 23 मार्च 2026

किसी भी राष्ट्र की उन्नति उसके युवाओं के चरित्र और उनकी सेवा भावना पर टिकी होती है। गोरखपुर जनपद के गोला तहसील क्षेत्र स्थित बंशीचंद पी.जी. कॉलेज, चिलवा में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर का पांचवा दिन सोमवार को राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता के नाम रहा। शिविर के माध्यम से स्वयंसेवक और स्वयंसेविकाओं को यह संदेश दिया गया कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ ‘राष्ट्र सेवा’ का व्यावहारिक अनुभव ही उन्हें एक कुशल और उत्तरदायी नागरिक बनाएगा।
मुख्य अतिथि का संबोधन: राष्ट्र का गौरव ही सर्वोच्च
शिविर के पांचवें दिन आयोजित बौद्धिक सत्र में बतौर मुख्य अतिथि संस्कृत के वरिष्ठ प्रवक्ता उमेश मिश्रा ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने अपने ओजस्वी विचारों से युवाओं में नई ऊर्जा का संचार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का मूल मंत्र ही ‘राष्ट्र सेवा एवं राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण’ है।
उन्होंने जोर देकर कहा, “प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में अपने राष्ट्र को प्रथम स्थान पर रखना चाहिए। एक कुशल नागरिक वही है, जिसके पास अपने देश को विकास के परम वैभव तक पहुँचाने की दक्षता और दृढ़ इच्छाशक्ति हो। किसी भी देश का उत्थान उसकी मूल अनिवार्यता है और एनएसएस इसी भावना का संचार नई पीढ़ी में करता है।”
भेदभाव मुक्त समाज का निर्माण
शिविर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह सात दिवसीय प्रवास केवल एक अकादमिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह युवाओं को ऊँच-नीच और जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर समाज की सेवा करने का माध्यम प्रदान करता है। शिविर के दौरान स्वयंसेवक सामूहिक रूप से कार्य करते हैं, एक साथ भोजन करते हैं और श्रमदान करते हैं, जिससे उनके भीतर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना बलवती होती है।
सत्र की अध्यक्षता और संचालन
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय कुमार सिंह ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि अनुशासन ही वह सीढ़ी है, जिससे युवा सफलता के शिखर तक पहुँच सकते हैं। कार्यक्रम का कुशल संचालन सर्वदानंद शाही ने किया, जिन्होंने बीच-बीच में प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।
अतिथियों का स्वागत और आभार
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रोहित चंद ने मुख्य अतिथि सहित सभी आगंतुकों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने शिविर की अब तक की प्रगति रिपोर्ट साझा की और बताया कि किस प्रकार स्वयंसेवक ग्रामीण अंचलों में स्वच्छता और साक्षरता का अलख जगा रहे हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए शिविर को लक्ष्य तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।
शिविर की दिनचर्या: श्रमदान से बौद्धिक विकास तक
पांचवें दिन की शुरुआत भोर में प्रभात फेरी और योग से हुई। इसके बाद स्वयंसेवकों ने गोद लिए गए गाँव की गलियों में श्रमदान कर स्वच्छता अभियान चलाया। दोपहर के सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें देशप्रेम से ओत-प्रोत गीतों और नाटकों की प्रस्तुति दी गई। शाम को ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।












