गोरखपुर: 19 मार्च 2026

उत्तर प्रदेश में मिलावटखोरों और नकली दवाओं के कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए शासन अब तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुट गया है। इसी क्रम में गुरुवार को उत्तर प्रदेश शासन की कड़क और अनुभवी आईएएस अधिकारी, सचिव रोशन जैकब ने गोरखपुर के नाथमालपुर स्थित क्षेत्रीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला का सघन निरीक्षण किया। उनके इस दौरे से विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा रहा, वहीं सचिव ने लैब की आधुनिक मशीनों और भवन निर्माण की गुणवत्ता की मुक्तकंठ से सराहना भी की।
अधिकारियों की फौज के साथ हुआ ‘ग्राउंड जीरो’ निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान सचिव रोशन जैकब के साथ गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा, संयुक्त आयुक्त (खाद्य) हरिशंकर सिंह, और अपर जिलाधिकारी (नगर) अंजनी सिंह सहित विभाग के सभी आला अधिकारी मौजूद रहे। सचिव ने प्रयोगशाला के हर एक कोने, विशेष रूप से नमूनों के रख-रखाव (Storage) और परीक्षण (Testing) के कमरों का बारीकी से मुआयना किया।

उन्होंने प्रयोगशाला के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और बिजली आपूर्ति की बैकअप व्यवस्था को भी देखा। कार्यदायी संस्था यूपीएसआईडीसी (UPSIDC) के इंजीनियरों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि छोटी-मोटी कमियों को तत्काल दूर किया जाए ताकि परिचालन में कोई बाधा न आए।
“गोरखपुर की यह प्रयोगशाला प्रदेश के अन्य मंडलों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर और आधुनिक है। इसे जल्द से जल्द पूरी क्षमता के साथ क्रियाशील किया जाए।” — रोशन जैकब, सचिव FSDA
जांच रिपोर्ट में देरी पर कड़ा रुख: “रिपोर्ट समय पर दें”
निरीक्षण के दौरान रोशन जैकब गोरखपुर में लैब की सुविधाओं से तो संतुष्ट दिखीं, लेकिन नमूनों की जांच प्रक्रिया में लगने वाले समय को लेकर उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि खाद्य और औषधि के नमूनों की जांच की गति को बढ़ाया जाए, ताकि रिपोर्ट समय से उपलब्ध हो सके।
सचिव ने चेतावनी दी कि नमूनों की जांच में देरी से दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में बाधा आती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आधुनिक मशीनों का अधिकतम उपयोग कर पेंडिंग रिपोर्ट की संख्या को शून्य पर लाएं।
सुरक्षा और सुविधा: सीसीटीवी और गेस्ट हाउस का निर्देश
प्रयोगशाला की सुरक्षा को लेकर सचिव ने ‘जीरो कॉम्प्रोमाइज’ की नीति अपनाते हुए पूरे परिसर में तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया। इसके पीछे का उद्देश्य लैब के भीतर होने वाली टेस्टिंग प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखना है।
साथ ही, उन्होंने कर्मचारियों और दूर-दराज से आने वाले आगंतुकों की सुविधा के लिए परिसर में ही कैंटीन और गेस्ट हाउस के निर्माण की योजना तैयार करने के निर्देश दिए। सचिव का मानना है कि बेहतर कार्य वातावरण से कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
प्रशासनिक अमले की मुस्तैदी
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान सहायक आयुक्त राजकुमार गुप्ता, सहायक आयुक्त (खाद्य)-II डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त (औषधि), औषधि निरीक्षक और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी भी उपस्थित रहे। सचिव ने इन सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे आपसी समन्वय के साथ मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान चलाएं और संदिग्ध नमूनों को तुरंत लैब भेजें।
भविष्य की योजना: मिलावट मुक्त गोरखपुर का संकल्प
इस निरीक्षण के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि गोरखपुर मंडल में अब खाद्य पदार्थों और दवाओं की सैंपलिंग और टेस्टिंग में क्रांतिकारी सुधार आएगा। रोशन जैकब गोरखपुर के इस दौरे ने स्थानीय प्रशासन को यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य मानकों से समझौता करने वाले किसी भी अपराधी या लापरवाह कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
नवनिर्मित भवन के संचालित होने से मंडल स्तर पर जांच की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे न केवल गोरखपुर बल्कि आसपास के जिलों को भी लाभ मिलेगा।













