बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार/गगहा, गोरखपुर: 19 March 2026

जनपद गोरखपुर के दक्षिणांचल में स्थित गोला तहसील का सुप्रसिद्ध डडौरी सम्मय माता धाम इन दिनों चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं से गुलजार है। गगहा ब्लॉक के ग्राम सभा डेहरीभार (डडौरी) में स्थित यह स्थान सदियों से भक्तों की आस्था का संबल बना हुआ है। डडौरी नामक स्थान पर स्थित होने के कारण माता को ‘डडौरी की सम्मय माता’ के नाम से ख्याति प्राप्त है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे मन से लवंग और कपूर अर्पित करता है, माँ उसके जीवन के सभी संकटों को हर लेती हैं। डडौरी सम्मय माता मंदिर 2026 की भव्यता और यहाँ होने वाले भजन-कीर्तन पूरे परिक्षेत्र को भक्तिमय बना रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: घने जंगल से आस्था के धाम तक का सफर
तहसील मुख्यालय से लगभग 7 किमी दूर गोला-कौड़ीराम मार्ग पर चिलवा तरैना पुल के समीप स्थित यह स्थान कभी निर्जन और खूंखार जंगली जानवरों का बसेरा हुआ करता था।
- मुसाफिरों की रक्षक: प्राचीन काल में यह क्षेत्र धौसहर उर्फ बेलवा भारी के घने जंगलों में तब्दील था। जंगल से गुजरने वाले राहगीरों के लिए माता सम्मय ही एकमात्र सहारा थीं। मार्ग भटके मुसाफिर माँ की मन्नत मानकर सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुँचते थे।
- मिट्टी के प्रतीक: प्रारंभ में माता एक नीम के पेड़ के नीचे मिट्टी के टूटे हुए हाथी और घोड़ों के प्रतीकों के रूप में पूजी जाती थीं। आज वही स्थान एक भव्य मंदिर का रूप ले चुका है।
महंत रामस्वरूप दास जी का सेवा संकल्प
इस प्राचीन शक्तिपीठ की एक विशेषता यह रही है कि यहाँ लंबे समय तक कोई पुजारी टिक नहीं पाता था। लेकिन कुछ समय पूर्व यहाँ महंत रामस्वरूप दास जी महाराज का आगमन हुआ। उनके कठिन परिश्रम, माता के प्रति अटूट सेवा भाव और जन-सहयोग से आज यहाँ मंदिर और धर्मशाला का सुंदर निर्माण हुआ है। उनके प्रयासों से ही यह निर्जन स्थान आज एक रमणीक धाम बन गया है।
नवरात्र का उल्लास: कीर्तन और भंडारे से सराबोर धाम
डडौरी सम्मय माता मंदिर 2026 में चैत्र और क्वार दोनों नवरात्रों में मेले जैसा दृश्य रहता है।
- मंदिर संकुल: मुख्य सम्मय माता मंदिर के साथ-साथ यहाँ साईं बाबा, हनुमान जी, भगवान शिव और श्रीकृष्ण के भी भव्य मंदिर स्थापित हैं, जो इसे एक पूर्ण आध्यात्मिक केंद्र बनाते हैं।
- भजन-कीर्तन: नवरात्र के दौरान यहाँ चौबीसों घंटे कीर्तन और भजनों का दौर चलता है, जिससे “जंगल में मंगल” की कहावत चरितार्थ होती है।
- दूर-दराज से आगमन: यहाँ केवल स्थानीय ग्रामीण ही नहीं, बल्कि गोरखपुर और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों से माता के दर्शन हेतु पहुँचते हैं।
भक्तों की मुरादें और आस्था
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता सम्मय संकटकाल में रक्षक की भूमिका निभाती हैं। भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर यहाँ कड़ाही चढ़ाने और विशेष पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। महंत जी के सानिध्य में यहाँ निरंतर साधु-संतों का समागम बना रहता है, जो इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा को और बढ़ाता है।













