बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 19 March 2026

गोला तहसील क्षेत्र के चिलवा स्थित बंशीचंद पी जी कॉलेज में गुरुवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर का विधिवत उद्घाटन किया गया। एनएसएस शिविर चिलवा 2026 के इस गरिमामय समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राणा सत्यप्रकाश सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया। इस शिविर का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में सामाजिक उत्तरदायित्व, अनुशासन और राष्ट्र प्रेम की भावना विकसित करना है।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका: प्राचार्य का संबोधन
शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. राणा सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना केवल एक पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।
- जाति-धर्म से ऊपर: उन्होंने जोर देकर कहा कि इन शिविरों के माध्यम से युवा जाति, धर्म और क्षेत्रवाद जैसी संकीर्ण विचारधाराओं से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करना सीखते हैं।
- व्यक्तित्व विकास: एनएसएस स्वयंसेवकों को समाज की जमीनी हकीकत से रूबरू कराता है, जिससे उनके नेतृत्व क्षमता में निखार आता है।
मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म: डॉ. रोहित चंद
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रोहित चंद ने सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इस मानव जीवन की सार्थकता तभी है जब हम दूसरों के प्रति प्रेम और करुणा का भाव रखें।“
उन्होंने बताया कि अगले सात दिनों तक स्वयंसेवक और सेविकाएं गोद लिए गए गांवों में स्वच्छता, साक्षरता और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे विभिन्न सामाजिक कार्यों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करेंगे।

शिक्षकों और प्रबुद्ध वर्ग का मिला मार्गदर्शन
कार्यक्रम में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों ने भी अपने विचार साझा किए।
- मृत्युंजय सिंह और सर्वदानंद शाही: ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सहभागिता पर बल दिया।
- अभिषेक जायसवाल: ने स्वयंसेवकों को अनुशासन के साथ शिविर के लक्ष्यों को प्राप्त करने की सीख दी।
- मंच संचालन: कार्यक्रम का कुशल संचालन उमेश मिश्रा द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से स्वयंसेवकों में जोश भर दिया।
सात दिवसीय कार्ययोजना का खाका
एनएसएस शिविर चिलवा के दौरान स्वयंसेवक प्रतिदिन अलग-अलग गतिविधियों में भाग लेंगे। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान, मतदाता जागरूकता, पौधरोपण और बौद्धिक सत्र शामिल हैं। शिविर के माध्यम से छात्र न केवल शारीरिक श्रम करेंगे, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान हेतु मंथन भी करेंगे।












