बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार/उरुवा, गोरखपुर: 15 March 2026

गोरखपुर जनपद के गोला तहसील अंतर्गत उरुवा थाना क्षेत्र के ग्राम रौजा दरगाह में रविवार को उस समय तनाव व्याप्त हो गया, जब गांव के एक सार्वजनिक और वर्षों पुराने संपर्क मार्ग को दीवार उठाकर बंद कर दिया गया। इस रास्ते का उपयोग न केवल सामान्य आवाजाही बल्कि ‘ताजियादारी’ के मुख्य मार्ग के रूप में भी किया जाता था। रास्ता बंद होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने महिलाओं के नेतृत्व में उरुवा धुरियापार मार्ग जाम 2026 कर दिया, जिससे करीब डेढ़ घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। पुलिस के हस्तक्षेप और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जाम खोला जा सका।
विवाद की जड़: रात के अंधेरे में खड़ी की गई दीवार
घटनाक्रम के अनुसार, गांव के एक पूर्व बसपा नेता ने उक्त मार्ग की जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए रविवार की रात चुपचाप दीवार खड़ी कर दी और रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया।
- सहरी के समय खुला राज: सोमवार भोर में जब रमजान के रोजेदार ‘सहरी’ के लिए उठे, तो मुख्य मार्ग को बंद देख उनके होश उड़ गए।
- मारपीट की नौबत: रास्ता बंद देखकर गुस्साए ग्रामीणों ने जब दीवार गिराने का प्रयास किया, तो दूसरे पक्ष से झड़प हो गई, जिसमें मारपीट की भी सूचना मिली है।
उरुवा-धुरियापार मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन
पुलिस ने सुबह मौके पर पहुंचकर स्थिति को भांपते हुए पूर्व बसपा नेता और उनके पुत्र को हिरासत में ले लिया। लेकिन रास्ता पूरी तरह न खुलने से नाराज ग्रामीणों ने सुबह लगभग 10:00 बजे उरुवा धुरियापार मार्ग जाम 2026 का आह्वान कर दिया।
- महिलाओं का नेतृत्व: ग्रामीणों ने रणनीति के तहत महिलाओं को आगे कर सड़क पर चटाई बिछा दी और धरने पर बैठ गए।
- आवागमन ठप: उरुवा से धुरियापार जाने वाले इस मुख्य मार्ग पर डेढ़ घंटे तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी कदम
सूचना मिलते ही उरुवा थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच और रास्ता खुलवाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम समाप्त हुआ।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने विवादित पक्ष (पूर्व बसपा नेता और उनके पुत्र) को पहले ही थाने पहुंचा दिया था।
- चलान: शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में पुलिस ने दोनों पक्षों का भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 170 के तहत चलान कर दिया है।
ताजियादारी और सार्वजनिक मार्ग का महत्व

ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता केवल आने-जाने का साधन नहीं है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक आस्था से भी जुड़ा है। उरुवा धुरियापार मार्ग जाम 2026 के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी व्यक्ति का एकाधिकार स्वीकार्य नहीं होगा। प्रशासन को चाहिए कि वह पैमाइश कराकर इस रास्ते को हमेशा के लिए सुरक्षित घोषित करे।













