नई दिल्ली/गोरखपुर: 13 March 2026
भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च सदन लोकसभा में आज गोरखपुर के लोकप्रिय सांसद रवि किशन ने देश के करोड़ों छोटे और पारंपरिक व्यापारियों की समस्याओं को प्रखरता से उठाया। सांसद रवि किशन लोकसभा भाषण 2026 के दौरान उन्होंने तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और ऑनलाइन व्यापार के कारण पारंपरिक बाजार पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की आक्रामक मार्केटिंग रणनीति छोटे दुकानदारों के अस्तित्व को मिटा रही है, जिसके लिए सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।
ऑनलाइन व्यापार बनाम पारंपरिक बाजार: एक असमान युद्ध
सांसद रवि किशन ने सदन में नियम 377 के तहत विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश का छोटा व्यापारी एक विषम परिस्थिति से गुजर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी पूंजी के दम पर ‘डीप डिस्काउंटिंग’ (भारी छूट) देते हैं, जिससे स्थानीय दुकानदार प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं।
सांसद ने सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा:
“हमारे छोटे व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। वे केवल सामान नहीं बेचते, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी देते हैं। लेकिन आज आक्रामक ऑनलाइन मार्केटिंग के कारण कई पारंपरिक व्यापारियों को अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह न केवल आर्थिक मुद्दा है, बल्कि सामाजिक न्याय का भी विषय है।“
सांसद रवि किशन की तीन प्रमुख मांगें
सांसद रवि किशन लोकसभा भाषण 2026 में उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष तीन महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जो छोटे व्यापारियों के भविष्य को सुरक्षित कर सकती हैं:
- ई-कॉमर्स के लिए सख्त रेगुलेशन: उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन व्यापार के लिए ऐसी स्पष्ट नीति बने जो बाजार में ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ (समान अवसर) सुनिश्चित करे। बड़े प्लेटफॉर्म्स द्वारा बाजार पर एकाधिकार स्थापित करने की कोशिशों पर लगाम लगाई जाए।
- स्थानीय दुकानदारों का संरक्षण: सरकार ऐसी योजनाएं लाए जिससे पारंपरिक व्यापारियों को तकनीक और ऋण के क्षेत्र में सहायता मिले, ताकि वे आधुनिक बाजार का सामना कर सकें।
- व्यापारियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा: सांसद ने विशेष रूप से छोटे व्यापारियों के परिवारों के लिए चिकित्सा बीमा (Health Insurance) और दुर्घटना बीमा (Accident Insurance) की मांग की।
व्यापारियों की सामाजिक असुरक्षा पर चिंता
सांसद ने भावुक होते हुए कहा कि देश का लाखों मध्यमवर्गीय व्यापारी दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन यदि उसके परिवार में कोई गंभीर बीमारी या दुर्घटना हो जाए, तो वह कर्ज के जाल में फंस जाता है। उनके पास कॉर्पोरेट जगत की तरह कोई सुरक्षा कवच नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि व्यापारियों के लिए एक समर्पित ‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ या बीमा योजना शुरू की जाए, ताकि संकट के समय उन्हें आर्थिक संबल मिल सके।

अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं छोटे व्यापारी
सांसद रवि किशन लोकसभा भाषण 2026 में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की जीडीपी में छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) और खुदरा व्यापारियों का बहुत बड़ा योगदान है। यदि ये पारंपरिक बाजार समाप्त हो गए, तो देश में बेरोजगारी की समस्या और विकराल हो सकती है। उन्होंने कहा कि “वोकल फॉर लोकल” का नारा तभी सार्थक होगा जब हम अपने स्थानीय दुकानदारों के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाएंगे।
सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील
अपने संबोधन के अंत में सांसद रवि किशन ने माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और वित्त मंत्री से अपील की कि इस विषय की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाने के लिए नई ‘ई-कॉमर्स पॉलिसी’ को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाए।
नई दिल्ली/गोरखपुर: भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च सदन लोकसभा में आज गोरखपुर के लोकप्रिय सांसद रवि किशन ने देश के करोड़ों छोटे और पारंपरिक व्यापारियों की समस्याओं को प्रखरता से उठाया। सांसद रवि किशन लोकसभा भाषण 2026 के दौरान उन्होंने तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और ऑनलाइन व्यापार के कारण पारंपरिक बाजार पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की आक्रामक मार्केटिंग रणनीति छोटे दुकानदारों के अस्तित्व को मिटा रही है, जिसके लिए सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।
ऑनलाइन व्यापार बनाम पारंपरिक बाजार: एक असमान युद्ध
सांसद रवि किशन ने सदन में नियम 377 के तहत विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश का छोटा व्यापारी एक विषम परिस्थिति से गुजर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी पूंजी के दम पर ‘डीप डिस्काउंटिंग’ (भारी छूट) देते हैं, जिससे स्थानीय दुकानदार प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं।
सांसद ने सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा:
“हमारे छोटे व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। वे केवल सामान नहीं बेचते, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी देते हैं। लेकिन आज आक्रामक ऑनलाइन मार्केटिंग के कारण कई पारंपरिक व्यापारियों को अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह न केवल आर्थिक मुद्दा है, बल्कि सामाजिक न्याय का भी विषय है।“
सांसद रवि किशन की तीन प्रमुख मांगें
सांसद रवि किशन लोकसभा भाषण 2026 में उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष तीन महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जो छोटे व्यापारियों के भविष्य को सुरक्षित कर सकती हैं:
- ई-कॉमर्स के लिए सख्त रेगुलेशन: उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन व्यापार के लिए ऐसी स्पष्ट नीति बने जो बाजार में ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ (समान अवसर) सुनिश्चित करे। बड़े प्लेटफॉर्म्स द्वारा बाजार पर एकाधिकार स्थापित करने की कोशिशों पर लगाम लगाई जाए।
- स्थानीय दुकानदारों का संरक्षण: सरकार ऐसी योजनाएं लाए जिससे पारंपरिक व्यापारियों को तकनीक और ऋण के क्षेत्र में सहायता मिले, ताकि वे आधुनिक बाजार का सामना कर सकें।
- व्यापारियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा: सांसद ने विशेष रूप से छोटे व्यापारियों के परिवारों के लिए चिकित्सा बीमा (Health Insurance) और दुर्घटना बीमा (Accident Insurance) की मांग की।
व्यापारियों की सामाजिक असुरक्षा पर चिंता
सांसद ने भावुक होते हुए कहा कि देश का लाखों मध्यमवर्गीय व्यापारी दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन यदि उसके परिवार में कोई गंभीर बीमारी या दुर्घटना हो जाए, तो वह कर्ज के जाल में फंस जाता है। उनके पास कॉर्पोरेट जगत की तरह कोई सुरक्षा कवच नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि व्यापारियों के लिए एक समर्पित ‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ या बीमा योजना शुरू की जाए, ताकि संकट के समय उन्हें आर्थिक संबल मिल सके।
अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं छोटे व्यापारी
सांसद रवि किशन लोकसभा भाषण 2026 में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की जीडीपी में छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) और खुदरा व्यापारियों का बहुत बड़ा योगदान है। यदि ये पारंपरिक बाजार समाप्त हो गए, तो देश में बेरोजगारी की समस्या और विकराल हो सकती है। उन्होंने कहा कि “वोकल फॉर लोकल” का नारा तभी सार्थक होगा जब हम अपने स्थानीय दुकानदारों के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाएंगे।
सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील
अपने संबोधन के अंत में सांसद रवि किशन ने माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और वित्त मंत्री से अपील की कि इस विषय की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाने के लिए नई ‘ई-कॉमर्स पॉलिसी’ को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाए।
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