गोलाबाजार, गोरखपुर: 7 मार्च 2026
समाज में बदलाव लाने के लिए केवल जोश की नहीं, बल्कि जागरूक सोच की भी आवश्यकता होती है। गोरखपुर के बेलघाट स्थित पंडित हरि सहाय पी.जी. कॉलेज, जैंती के प्रांगण में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर का तीसरा दिन इसी ‘जागरूक सोच’ को समर्पित रहा। शनिवार को शिविर के दौरान स्वयंसेवकों के लिए एक विशेष ‘कानून एवं नागरिक अधिकार’ विषयक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य युवा छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान, उनके मौलिक अधिकारों और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उनके कर्तव्यों के प्रति सचेत करना था।

मुख्य वक्ता का संदेश: कानून ही न्याय का आधार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रसिद्ध एडवोकेट एवं संस्थापक अध्यक्ष पं. हनुमान प्रसाद दूबे ने बड़े ही सरल और प्रभावी ढंग से युवाओं को कानून की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत भारतीय संविधान की प्रस्तावना से करते हुए कहा कि कानून केवल सजा देने का जरिया नहीं है, बल्कि यह समाज में शांति, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा माध्यम है।
उन्होंने जोर देकर कहा, “यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करने लगे, तो आधी से ज्यादा सामाजिक समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी।” उनके इस वक्तव्य ने स्वयंसेवकों को आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित किया।

साइबर अपराध और महिला सुरक्षा: आज की बड़ी चुनौती
बदलते समय के साथ अपराधों के तरीके भी बदले हैं। एडवोकेट दूबे ने स्वयंसेवकों को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती साइबर अपराध के प्रति आगाह किया। उन्होंने बताया कि कैसे अनजाने में सोशल मीडिया या डिजिटल लेन-देन के दौरान लोग धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं और इससे बचने के कानूनी उपाय क्या हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने महिला सुरक्षा कानून, बाल अधिकार और उपभोक्ता अधिकारों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को विशेष रूप से बताया कि किसी भी प्रकार के अन्याय या प्रताड़ना की स्थिति में वे कैसे कानूनी सहायता (Legal Aid) प्राप्त कर सकती हैं और इसमें पुलिस व न्यायालय की क्या भूमिका होती है।
जिज्ञासा और संवाद का सत्र
केवल व्याख्यान ही नहीं, बल्कि यह सत्र एक जीवंत संवाद में बदल गया। स्वयंसेवकों ने अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए वक्ता से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। किसी ने एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में पूछा, तो किसी ने ‘राइट टू इन्फॉर्मेशन’ (RTI) के प्रभावी उपयोग के बारे में जानकारी ली। एडवोकेट दूबे ने प्रत्येक प्रश्न का उत्तर बड़े ही धैर्य के साथ दिया, जिससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा।
सामाजिक जिम्मेदारी का आह्वान
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह और डॉ. कौशल कुमार पाठक ने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे इस शिविर से जो कानूनी ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं, उसे केवल अपने तक सीमित न रखें। उन्होंने कहा कि एक एनएसएस स्वयंसेवक का कर्तव्य है कि वह अपने आस-पास के गाँवों और समाज के गरीब व अशिक्षित लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करे।
महाविद्यालय परिवार की उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सर्वेश दूबे ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि शिक्षित युवा ही एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण कर सकते हैं। इस अवसर पर डॉ. हरिश्चंद्र सिंह, डॉ. इकबाल अहमद, डॉ. सचीन्द्र कुमार, डॉ. मृत्युंजय त्रिपाठी, डॉ. कमला कान्त मिश्र और दिनेश शुक्ल सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षकगण मौजूद रहे।
शिविर के तीसरे दिन स्वयंसेवकों का उत्साह चरम पर था। दिन की शुरुआत योग और श्रमदान से हुई, जिसके बाद इस बौद्धिक सत्र ने उनकी सोच को एक नई दिशा दी। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से ‘कानूनी साक्षरता’ का संदेश देने वाले लघु नाटकों का मंचन भी किया गया।
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