गोलाबाजार, गोरखपुर: 27 फरवरी 2026
जनपद की प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए जिला प्रशासन के मुखिया दीपक मीणा शुक्रवार की देर शाम पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में नजर आए। जिलाधिकारी ने गोला तहसील का औचक निरीक्षण कर राजस्व और न्यायिक कार्यों की समीक्षा की। तहसील के उपरांत देर रात जिलाधिकारी का काफिला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गोला पहुँचा, जहाँ उन्होंने रात्रि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की उपस्थिति जांची। इस जिलाधिकारी निरीक्षण से पूरे तहसील परिसर और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा, हालांकि संतोषजनक स्थिति मिलने पर डीएम ने प्रसन्नता भी जाहिर की।

तहसील निरीक्षण: ई-फाइलिंग और पेंडिंग केस पर जोर
शुक्रवार की शाम जब जिलाधिकारी गोला तहसील पहुँचे, तो उन्होंने सबसे पहले लंबित पत्रावलियों और जन शिकायतों की स्थिति देखी। समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने कड़े लहजे में कहा कि आईजीआरएस (IGRS) के मामले, तहसील दिवस की शिकायतें और प्रतिदिन आने वाले प्रार्थना पत्रों को अनिवार्य रूप से ई-फाइल के माध्यम से मूवमेंट किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि फाइलों की भौतिक गतिशीलता की जगह डिजिटल पारदर्शिता पर जोर दिया जाना चाहिए।
लेखागार और बस्तों का अपडेशन: लेखागार (Record Room) के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने बस्तों (रिकॉर्ड्स) को तत्काल अपडेट करें। यदि रिकॉर्ड रूम में कोई कमी है, तो उच्च अधिकारियों से समन्वय कर आवश्यक दस्तावेज मंगाएं। उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेखों का रखरखाव शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।
न्यायिक कार्यों की समीक्षा और लेखपालों को चेतावनी
जिलाधिकारी ने तहसील कोर्ट की स्थिति पर असंतोष जाहिर करते हुए पीठासीन अधिकारियों को रजिस्टर मेंटेन करने और पुराने मुकदमों को समय सीमा के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिए।
- कोर्ट आदेश का पालन: डीएम ने कहा कि कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का फील्ड में अनुपालन (Compliance) सुनिश्चित किया जाए।
- लेखपालों की भूमिका: जो रिपोर्ट पेंडिंग है, उन्हें लेखपालों से तत्काल मंगवाकर पत्रावलियां दुरुस्त की जाएं।
- सख्त चेतावनी: डीएम ने साफ तौर पर कहा कि एसआईआर (SIR) और फार्मर रजिस्ट्री के कार्यों में यदि किसी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी ने देरी की, तो उनके खिलाफ कठोर विभागीय और अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सीएचसी गोला पर देर रात दस्तक
तहसील के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी का काफिला सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गोला पहुँचा। रात करीब 7 बजकर 50 मिनट पर जब डीएम अस्पताल परिसर में दाखिल हुए, तो वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों में खलबली मच गई। जिलाधिकारी ने सीधे उपस्थिति रजिस्टर (Attendance Register) की जांच की। राहत की बात यह रही कि औचक निरीक्षण के दौरान रात्रि ड्यूटी पर तैनात सभी चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद मिले। डीएम ने वार्डों का भ्रमण कर मरीजों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली।
संतुष्टि के साथ रवाना हुआ काफिला
करीब 20 मिनट तक अस्पताल की व्यवस्थाओं को परखने के बाद रात 8 बजकर 10 मिनट पर जिलाधिकारी का काफिला जिला मुख्यालय के लिए रवाना हो गया। इस पूरे जिलाधिकारी निरीक्षण के दौरान दीपक मीणा तहसील के प्रशासनिक कार्यों और स्वास्थ्य केंद्र की कार्यशैली से पूर्णतः संतुष्ट दिखे। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को इसी तत्परता और ईमानदारी से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।
जनता के लिए संदेश
इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में अनुशासन बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दर-दर न भटकना पड़े। डीएम के इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि गोरखपुर प्रशासन अब लापरवाह कर्मचारियों को बख्शने के मूड में नहीं है।
निष्कर्ष
जिलाधिकारी दीपक मीणा का यह औचक दौरा यह संदेश देता है कि समय चाहे देर शाम का हो या रात का, शासन की नज़र हर विभाग पर है। तहसील में डिजिटल फाइलिंग और स्वास्थ्य केंद्रों पर शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना एक सकारात्मक कदम है। यदि जिले के अन्य अधिकारी भी इसी प्रकार मुस्तैद रहें, तो विकास और सुशासन की गति को और तेज किया जा सकता है।














