गोलाबाजार, गोरखपुर: 26 फरवरी 2026
गोरखपुर जनपद के गोला तहसील अंतर्गत ग्राम काल्हीपार में जमीन के एक टुकड़े को लेकर चल रहा पुराना विवाद अब हिंसक रूप ले चुका है। न्यायालय से आदेश प्राप्त होने के बावजूद दबंगों द्वारा निर्माण कार्य रोकने और मारपीट करने का मामला सामने आया है।
पीड़ित की तहरीर पर गोला पुलिस ने गांव के ही चार नामजद व्यक्तियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है।
क्या है पूरा प्रकरण?
प्राप्त विवरण के अनुसार, काल्हीपार गांव निवासी प्रेमचंद दुबे और उनके विपक्षी गणों के बीच आराजी संख्या 91 को लेकर लंबे समय से जमीनी विवाद चल रहा था। प्रेमचंद दुबे ने पुलिस को बताया कि इस भूमि के संबंध में न्यायालय ने उनके पक्ष में आदेश पारित किया था।
न्यायालय के इसी आदेश के अनुपालन में बीते 8 जनवरी 2026 को प्रशासन द्वारा विधिवत ‘दखल दहानी’ की कार्रवाई भी संपन्न हो चुकी थी। राजस्व विभाग की टीम ने जमीन के चारों कोनों पर पत्थर गाड़कर निशानदेही भी कर दी थी, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि भूमि पर प्रेमचंद दुबे का विधिक अधिकार है।
24 फरवरी की घटना: निर्माण के दौरान हमला
विवाद उस समय हिंसक हो गया जब 24 फरवरी को प्रेमचंद दुबे अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) का निर्माण करा रहे थे। ईंटों की जुड़ाई का काम चल ही रहा था कि तभी गांव के ही अरविंद दुबे, आशीष दुबे, मनीष दुबे और गंगेश दुबे वहां पहुँच गए।
आरोप है कि इन लोगों ने जबरन अपनी नाली का पानी प्रेमचंद के खेत में बहाने की जिद शुरू कर दी। जब प्रेमचंद और उनके बेटों ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने आपा खो दिया। लाठी-डंडों से लैस हमलावरों ने प्रेमचंद दुबे और उनके दो बेटों सर्वेश व प्रशांत पर जानलेवा हमला कर दिया।
मारपीट और जान से मारने की धमकी
पीड़ित प्रेमचंद दुबे ने तहरीर में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उन्हें और उनके बेटों को बुरी तरह मारा-पीटा, जिससे उन्हें काफी चोटें आई हैं। हमलावरों ने काम कर रहे मजदूरों को भी डराया और निर्माण कार्य तुरंत रुकवाने की धमकी दी। जाते-जाते दबंगों ने यह भी कहा कि “अगर दोबारा निर्माण शुरू किया, तो जान से हाथ धोना पड़ेगा।”
शोर सुनकर जब आसपास के ग्रामीण इकट्ठा होने लगे, तो आरोपी मौके से फरार हो गए। पीड़ित परिवार ने तत्काल स्थानीय थाने पहुँचकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई और नामजद तहरीर दी।
गोला पुलिस की कार्रवाई
- गोला पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और न्यायालय के आदेश की अवहेलना को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने चारों आरोपियों—अरविंद दुबे, आशीष दुबे, मनीष दुबे और गंगेश दुबे के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
- न्यायालय की अवहेलना: पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि जब प्रशासन ने दखल दहानी करा दी थी, तो आरोपियों ने कानून को हाथ में लेने का दुस्साहस कैसे किया।दबिश: आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें उनके ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

जमीनी विवाद और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता तनाव
काल्हीपार की यह घटना कोई अकेली वारदात नहीं है। गोला तहसील क्षेत्र में जमीनी विवाद के दर्जनों मामले लंबित हैं, जो अक्सर हिंसा का कारण बनते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग और पुलिस के बीच समन्वय की कमी के कारण ऐसे विवाद सुलझने के बजाय और उलझ जाते हैं।
हालांकि, इस मामले में दखल दहानी हो चुकी थी, फिर भी दबंगई के बल पर कब्जा करने की कोशिश ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
निष्कर्ष
काल्हीपार गांव में हुई यह मारपीट दर्शाती है कि जमीन के प्रति मोह और कानूनी आदेशों के प्रति अनादर किस प्रकार अपराध को जन्म देता है। प्रेमचंद दुबे और उनके बेटों पर हुआ हमला न केवल एक परिवार पर प्रहार है, बल्कि यह न्यायपालिका के आदेशों को भी चुनौती है।
गोला पुलिस को चाहिए कि वह फरार आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुँचाए और पीड़ित परिवार को उनकी अपनी ही भूमि पर सुरक्षा प्रदान करे, ताकि वे अपना निर्माण कार्य निर्भय होकर पूर्ण कर सकें।












