गोरखपुर: 24 फरवरी 2026
गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की महिला डॉक्टर के साथ सरेराह हुई छेड़खानी और नस्लीय टिप्पणी के मामले में पुलिस ने अपनी जांच और कार्रवाई को पूर्ण करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। इस सनसनीखेज प्रकरण में फरार चल रहे तीसरे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसी के साथ इस घटना में शामिल तीनों युवक अब पुलिस की गिरफ्त में हैं और उन्हें न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कड़ी निगरानी के बाद हुई इस त्वरित कार्रवाई से रेजिडेंट डॉक्टरों और आम जनता में सुरक्षा का भरोसा जागा है।
तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी और पहचान
कैंट थाना पुलिस और स्वात (SWAT) टीम की संयुक्त कार्रवाई में मंगलवार देर रात घटना के अंतिम फरार आरोपी को दबोच लिया गया। पकड़े गए आरोपी की पहचान आदित्य राव के रूप में हुई है। आदित्य देवरिया जिले के रामपुर खास गांव का मूल निवासी है। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से ही आदित्य अपनी लोकेशन बदल रहा था, लेकिन डिजिटल सर्विलांस और मुखबिरों की सटीक सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
इससे पहले सोमवार, 23 फरवरी को पुलिस ने दो अन्य आरोपियों सूरज गुप्ता और अमृत विश्वकर्मा को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। ये दोनों भी देवरिया जिले के ही रहने वाले हैं। इस तरह इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाली पूरी टोली अब सलाखों के पीछे है।
क्या थी 22 फरवरी की वह खौफनाक घटना?
घटना 22 फरवरी की रात करीब आठ बजे की है। पीड़िता, जो नागालैंड की रहने वाली हैं और एम्स गोरखपुर में डॉक्टर हैं, अपनी एक महिला साथी डॉक्टर के साथ स्कूटी से ओरियन मॉल से खरीदारी कर लौट रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार इन तीन युवकों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया।
नस्लीय टिप्पणी और पीछा: पीड़िता ने अपनी तहरीर में बताया कि आरोपियों ने उनके पहनावे और मूल स्थान को लेकर भद्दी और नस्लीय टिप्पणियां कीं। जब डॉक्टर ने इसका विरोध किया, तो आरोपी और अधिक आक्रामक हो गए। उन्होंने ओरियन मॉल से लेकर एम्स गेट नंबर-2 तक करीब डेढ़ किलोमीटर तक स्कूटी का पीछा किया।
जानलेवा धमकी और ‘बैड टच’: हद तो तब हो गई जब एम्स गेट के पास पहुँचते ही एक आरोपी ने अपनी शर्ट उतार दी और डॉक्टर को डराते हुए ‘बैड टच’ (गलत तरीके से छूना) किया। विरोध करने पर उन्होंने डॉक्टर को जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना ने डॉक्टर को गहरे मानसिक सदमे में डाल दिया था।

पुलिस की सक्रियता और विधिक प्रक्रिया
क्षेत्राधिकारी (सीओ) कैंट योगेंद्र सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि पीड़िता की तहरीर पर मंगलवार को गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ के निर्देश पर गठित चार टीमों ने युद्ध स्तर पर जांच शुरू की।
- CCTV फुटेज: मॉल और एम्स के बीच लगे दर्जनों कैमरों की जांच की गई, जिससे बाइक का नंबर और आरोपियों के हुलिए की पुष्टि हुई।
- धाराएं: आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं, पॉक्सो (यदि लागू हो) और विशेष रूप से महिला गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
क्षेत्राधिकारी ने स्पष्ट किया कि तीसरा आरोपी गिरफ्तार होने के बाद अब पुलिस साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय में पेश करेगी ताकि इन मनचलों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
रेजिडेंट डॉक्टरों का आक्रोश और सुरक्षा की मांग
इस घटना के बाद एम्स गोरखपुर के रेजिडेंट डॉक्टरों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था। नाफोर्ड (NAFORD) संगठन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग कर हस्तक्षेप की मांग की थी। डॉक्टरों का कहना है कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के बाहर ऐसी घटना होना प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान है।
पुलिस ने अब एम्स के आसपास और ओरियन मॉल वाले मार्ग पर ‘पिंक पेट्रोल’ और रात की गश्त बढ़ाने का आश्वासन दिया है। इसके अतिरिक्त, एम्स प्रशासन से भी अनुरोध किया गया है कि वे अपने गेटों पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे और बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करें।

देवरिया के रहने वाले हैं तीनों आरोपी
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि गिरफ्तार किए गए तीनों युवक आदित्य राव, सूरज गुप्ता और अमृत विश्वकर्मा देवरिया जिले के निवासी हैं और वे किसी काम के सिलसिले में या घूमने गोरखपुर आए थे। पुलिस अब इनके पुराने आपराधिक इतिहास को भी खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन्होंने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है।
निष्कर्ष
गोरखपुर पुलिस द्वारा तीसरे आरोपी को गिरफ्तार करना और महज 48 घंटों में पूरी गुत्थी सुलझाना सराहनीय है। एम्स की महिला डॉक्टर के साथ हुई यह घटना महिला सुरक्षा की दिशा में अभी भी मौजूद चुनौतियों को दर्शाती है। हालांकि, आरोपियों का जेल जाना यह संदेश देता है कि कानून की नजर से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता। अब समाज और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और हर कामकाजी महिला निर्भीक होकर अपने कर्तव्यों का पालन कर सके।












