गोरखपुर: 10 फरवरी 2026
गोरखपुर के नवागत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने जिले की कानून-व्यवस्था को नया आयाम देने और पुलिस की छवि सुधारने के लिए अब जमीनी स्तर के अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मंगलवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने वर्ष 2023 बैच के करीब 200 नवनियुक्त उपनिरीक्षकों (SI) को ‘ईमानदारी और निष्पक्ष पुलिसिंग‘ का पाठ पढ़ाया। दो घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में एसएसपी ने साफ़ कर दिया कि उनके राज में खाकी का रौब निर्दोषों पर नहीं, बल्कि अपराधियों पर दिखना चाहिए।
जनता का विश्वास ही असली पूंजी
बैठक को संबोधित करते हुए एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने कहा कि पुलिस विभाग की सबसे बड़ी ताकत जनता का भरोसा है। उन्होंने युवा दरोगाओं को समझाते हुए कहा, “पुलिस की वर्दी का सम्मान तभी है जब आम नागरिक आपको देखकर सुरक्षित महसूस करे, न कि भयभीत। निष्पक्ष पुलिसिंग केवल एक शब्द नहीं, बल्कि आपकी कार्यशैली का आधार होना चाहिए।” उन्होंने निर्देश दिया कि थानों पर आने वाले हर फरियादी की बात पूरी शालीनता और गंभीरता के साथ सुनी जाए।
दोषी को छोड़ा तो तय होगी जवाबदेही
एसएसपी ने बैठक में बेहद सख्त रुख अख्तियार करते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से परेशान किया गया, तो मैं सख्त कार्रवाई करूँगा। लेकिन साथ ही, अगर किसी असली अपराधी को पकड़ने के बाद किसी दबाव या लालच में छोड़ा गया, तो संबंधित दरोगा के विरुद्ध विभागीय जांच और निलंबन तय है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और अपराधियों के प्रति सहानुभूति दिखाने वालों के लिए पुलिस विभाग में कोई जगह नहीं है।

विवेचना की गुणवत्ता और तकनीक पर जोर
बैठक के दौरान केवल अनुशासन ही नहीं, बल्कि कार्य की गुणवत्ता पर भी विस्तार से चर्चा हुई। निष्पक्ष पुलिसिंग को सुनिश्चित करने के लिए एसएसपी ने निम्नलिखित बिंदुओं पर निर्देश दिए:
- गुणवत्तापूर्ण विवेचना: चार्जशीट दाखिल करने से पहले साक्ष्यों का गहराई से अध्ययन किया जाए ताकि अपराधी अदालत से बच न सके।
- महिला सुरक्षा: महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता दिखाई जाए और तुरंत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई हो।
- तकनीक का उपयोग: अपराधियों को पकड़ने और रिकॉर्ड अपडेट रखने के लिए आधुनिक तकनीक और सर्विलांस का अधिकतम उपयोग किया जाए।
वरिष्ठ अधिकारियों ने भी दिया जीत का मंत्र
बैठक में एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने अनुशासन और टीम वर्क के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि एक दरोगा तभी सफल है जब उसका सूचना तंत्र (Informer System) मजबूत हो। वहीं, एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र ने सक्रिय पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र की छोटी से छोटी हलचल की जानकारी रखना ही अपराध रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’
डॉ. कौस्तुभ ने युवा अधिकारियों को करियर की शुरुआत में ही ईमानदारी का रास्ता चुनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पुलिस की जड़ें खोखला कर देता है। जो अधिकारी ईमानदारी से मेहनत करेंगे, उन्हें विभाग की ओर से पुरस्कृत और प्रोत्साहित किया जाएगा, लेकिन लापरवाही बरतने वालों पर गाज गिरना तय है।
पुलिस महकमे में नई ऊर्जा का संचार
एसएसपी की इस बैठक को पुलिस महकमे में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। 2023 बैच के इन युवा उपनिरीक्षकों के कंधों पर ही आने वाले समय में जिले की सुरक्षा का भार होगा। ऐसे में कप्तान का यह ‘कौस्तुभ मंत्र’ उन्हें सही दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करेगा।
निष्कर्ष
गोरखपुर में निष्पक्ष पुलिसिंग की जो नींव एसएसपी डॉ. कौस्तुभ रख रहे हैं, वह स्वागत योग्य है। “निर्दोष को छुओ मत और दोषी को छोड़ो मत” का सिद्धांत यदि धरातल पर उतरता है, तो निश्चित रूप से गोरखपुर पुलिस की प्रतिष्ठा में चार चांद लग जाएंगे। जनता को अब उम्मीद है कि थानों पर उनकी सुनवाई होगी और न्याय केवल रसूखदारों की जागीर नहीं रहेगा।
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