गोरखपुर: 10 फरवरी 2026
गोरखपुर जिले में बच्चों को कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को एक बड़ा मोर्चा संभाला। अवसर था राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (National Deworming Day) का, जिसके तहत जिले भर के सरकारी व निजी स्कूलों, मदरसों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक से उन्नीस वर्ष की आयु के बच्चों को पेट के कीड़े निकालने वाली सुरक्षित दवा ‘एल्बेंडाजोल’ खिलाई गई। स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार जिले में 23.72 लाख बच्चों को कवर करने का विशाल लक्ष्य रखा गया है।
जवाहर नवोदय विद्यालय से अभियान का आगाज
अभियान का औपचारिक शुभारंभ पीपीगंज स्थित श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान हुआ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेश झा ने दीप प्रज्वलित कर और बच्चों को अपने सामने दवा खिलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान विद्यालय परिसर में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए शिविर भी लगाया गया।
सीएमओ डॉ. राजेश झा का संदेश: कुपोषण के खिलाफ जरूरी जंग
समारोह को संबोधित करते हुए सीएमओ डॉ. राजेश झा ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, “पेट के कीड़े बच्चों के शरीर से पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे बच्चे कुपोषण और एनीमिया का शिकार हो जाते हैं। इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है।”
उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों को सलाह दी कि साल में कम से कम दो बार कृमिनाशक दवा का सेवन बच्चों की सेहत के लिए अनिवार्य है। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है।
विशाल नेटवर्क: 8000 से अधिक केंद्रों पर वितरण
जिले के स्वास्थ्य ढांचे ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। एसीएमओ आरसीएच डॉ. ए.के. चौधरी ने आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि दवा के सफल वितरण के लिए निम्नलिखित केंद्रों को सक्रिय किया गया:
- सरकारी स्कूल: 2503
- निजी स्कूल व मदरसे: 2069
- आंगनबाड़ी केंद्र: 4244
कुल मिलाकर, स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के प्रत्येक बच्चे तक पहुँचने का विस्तृत रोडमैप तैयार किया है।

13 फरवरी को ‘मॉप-अप’ राउंड: कोई बच्चा न छूटे
प्रशासन ने उन बच्चों के लिए भी विशेष योजना बनाई है जो मंगलवार को किसी कारणवश (बीमारी या अनुपस्थिति) स्कूल या केंद्र नहीं पहुँच सके। डॉ. राजेश झा ने बताया कि ऐसे छूटे हुए बच्चों को 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड के दौरान दवा खिलाई जाएगी। विभाग का संकल्प है कि जिले का एक भी बच्चा इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।
सावधानी और स्वास्थ्य सलाह
एसीएमओ डॉ. ए.के. चौधरी ने बताया कि दवा खाने के बाद कुछ बच्चों को मामूली मितली, जी मिचलाना या हल्का चक्कर महसूस हो सकता है। यह इस बात का संकेत है कि दवा अपना काम कर रही है और पेट के कीड़े मर रहे हैं। यह स्थिति सामान्य है और थोड़ी देर विश्राम के बाद अपने आप ठीक हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी कि दवा हमेशा भोजन के बाद ही खानी चाहिए, क्योंकि खाली पेट दवा का प्रभाव कम हो सकता है।
विशेषज्ञों की उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई से डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय और आरबीएसके योजना की डीईआईसी मैनेजर डॉ. अर्चना भी मौजूद रहीं। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों के बीच दवा वितरण के सही तरीके और स्वच्छता (हाथ धोना, नाखून काटना) के प्रति जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए।
निष्कर्ष
गोरखपुर में आयोजित यह राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस न केवल एक स्वास्थ्य अभियान है, बल्कि एक स्वस्थ समाज की नींव रखने का प्रयास भी है। 23 लाख से अधिक बच्चों को दवा खिलाना प्रशासन की बड़ी उपलब्धि है। यदि अभिभावक और शिक्षक इसी तरह स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करते रहे, तो निश्चित रूप से गोरखपुर कुपोषण मुक्त जिले के रूप में उभर कर सामने आएगा।
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