गोरखपुर: 09 फरवरी 2026
गोरखपुर के सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र पर तैनात एक कर्मठ संविदा कर्मचारी की मौत की खबर ने पूरे विभाग को झकझोर कर रख दिया है। शहर के मोहनलालपुर क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति बहाल करने की कोशिश कर रहे लाइनमैन मोहम्मद सलीम उर्फ राजू (मोहम्मद सलीम) काल के गाल में समा गए। यह घटना न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि संविदा पर काम करने वाले उन हजारों बिजली कर्मियों की सुरक्षा की पोल भी खोलती है जो अपनी जान हथेली पर रखकर शहर को रोशन करते हैं।

शटडाउन के बावजूद कैसे दौड़ी बिजली?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले मोहनलालपुर इलाके में सोमवार को विद्युत सप्लाई बाधित हो गई थी। लाइनमैन मोहम्मद सलीम उर्फ राजू अपनी टीम के साथ फॉल्ट ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़े थे। बताया जा रहा है कि लाइन पर काम शुरू करने से पहले नियमानुसार शटडाउन लिया गया था।
दुखद पहलू यह रहा कि जब राजू तार को जोड़ने का कार्य कर रहे थे, तभी अचानक लाइन में करंट प्रवाहित हो गया। जबरदस्त करंट की चपेट में आने से राजू बुरी तरह झुलस गए और मौके पर ही अचेत हो गए। स्थानीय लोगों और सहकर्मियों में चीख-पुकार मच गई।

अस्पताल पहुँचने से पहले ही थमी सांसें
घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद लोगों और अन्य विद्युत कर्मियों ने आनंद-फानन में राजू को खंभे से नीचे उतारा और तत्काल जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में लेकर पहुँचे। परिजनों और साथियों की आंखों में उम्मीद थी कि शायद डॉक्टर राजू की जान बचा लें, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद मोहम्मद सलीम उर्फ राजू को मृत घोषित कर दिया।
मर्चरी हाउस पर जुटी भीड़, कर्मचारियों में आक्रोश
राजू की मौत की खबर जैसे ही सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र और अन्य सब-स्टेशनों पर पहुँची, बिजली कर्मियों में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में कर्मचारी नेता, बिजली विभाग के अधिकारी और राजू के साथी जिला चिकित्सालय की मर्चरी (Mortuary) पर जमा हो गए।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही का नतीजा है। अगर शटडाउन लिया गया था, तो अचानक बिजली कैसे चालू कर दी गई? क्या विद्युत उपकेंद्र से तालमेल की कोई कमी थी या यह किसी तकनीकी खराबी का परिणाम है?
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
मृतक मोहम्मद सलीम उर्फ राजू अपने परिवार के मुख्य आधार थे। उनकी अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। राजू के मिलनसार स्वभाव और कार्य के प्रति उनकी निष्ठा को याद कर साथी कर्मचारी भी अपनी आंखों से आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर परिजनों को ढांढस बंधाया, लेकिन मुआवजे और सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों ने सख्त रुख अपनाया है।
संविदा कर्मियों की सुरक्षा पर उठते सवाल
यह पहली बार नहीं है जब किसी विद्युत उपकेंद्र से जुड़े संविदा कर्मचारी की काम के दौरान मौत हुई हो। बिजली विभाग में संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों को अक्सर पर्याप्त सुरक्षा उपकरण (जैसे सेफ्टी बेल्ट, ग्लव्स, टेस्टर) उपलब्ध नहीं कराए जाते। साथ ही, उपकेंद्रों और फील्ड स्टाफ के बीच समन्वय की कमी के कारण शटडाउन के दौरान बिजली आ जाने जैसी घटनाएं जानलेवा साबित होती हैं।
पुलिस और विभाग की जांच शुरू
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। विभागीय उच्चाधिकारियों ने भी इस मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र के लॉगबुक और शटडाउन रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि लापरवाही किस स्तर पर हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाई गई, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र के इस वीर सिपाही की शहादत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि बिजली विभाग में सुरक्षा मानकों के साथ कोई भी समझौता जानलेवा हो सकता है। मोहम्मद सलीम उर्फ राजू अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मौत उन कमियों को उजागर कर गई है जिन्हें सुधारने की जरूरत है। अब देखना यह है कि प्रशासन पीड़ित परिवार को कितना आर्थिक सहयोग प्रदान करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।
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