चौरी चौरा, गोरखपुर: 07 फरवरी 2026
गोरखपुर जिले की चौरी चौरा तहसील में शनिवार का दिन आम जनता के लिए विशेष रहा, जब शासन के दो बड़े अधिकारियों—मंडलायुक्त और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी)—ने खुद जनता की अदालत में बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ के अवसर पर आयोजित इस विशेष जनसुनवाई में भारी जनसमूह उमड़ा। उच्चाधिकारियों की मौजूदगी ने न केवल फरियादियों में विश्वास पैदा किया, बल्कि स्थानीय प्रशासनिक अमले को भी कार्य के प्रति और अधिक जवाबदेह बनाया।

उच्चाधिकारियों की सीधी जनसुनवाई: गुणवत्ता पर जोर
चौरी चौरा तहसील के सभागार में आयोजित इस बैठक के दौरान मंडलायुक्त ने एक-एक कर फरियादियों से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल शिकायतों का पंजीकरण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे पीड़ित को वास्तविक न्याय मिले। मंडलायुक्त ने चेतावनी दी कि निस्तारण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डीआईजी ने पुलिस विभाग से संबंधित मामलों की समीक्षा की और थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए त्वरित कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि पुलिस का व्यवहार जनता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए ताकि वे निर्भीक होकर अपनी बात कह सकें।
प्रमुख विभागों की शिकायतों पर रहा ध्यान
चौरी चौरा तहसील में आयोजित इस समाधान दिवस में मुख्य रूप से निम्नलिखित विभागों से जुड़ी समस्याएं सामने आईं:
- राजस्व विभाग: जमीन की पैमाइश, अवैध कब्जे और वरासत से जुड़े मामले सबसे अधिक रहे।
- पुलिस विभाग: मारपीट, पड़ोसियों के विवाद और चोरी की घटनाओं में कार्रवाई की मांग की गई।
- विकास विभाग: आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन और मनरेगा के कार्यों में आ रही अड़चनों को उठाया गया।
- बिजली और जलापूर्ति: क्षेत्र के कई गांवों से बिजली बिल में अनियमितता और नल-जल योजना के सुचारू संचालन की शिकायतें दर्ज की गईं।
मौके पर निस्तारण और समयसीमा का निर्धारण
अधिकारियों ने कई ऐसे मामलों को तत्काल सुलझा दिया जिनमें जटिलताएं कम थीं। जिन प्रकरणों में स्थलीय निरीक्षण या विधिक प्रक्रिया की आवश्यकता थी, उनके लिए मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को एक निश्चित समयसीमा (Deadline) तय कर दी। चौरी चौरा तहसील के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे सप्ताह के भीतर इन फाइलों का निपटारा कर रिपोर्ट सौंपें।
पारदर्शिता और समयबद्धता: शासन की प्राथमिकता
मंडलायुक्त ने बैठक के दौरान सुशासन पर जोर देते हुए कहा, “शासन की स्पष्ट मंशा है कि जनता की समस्याओं का समाधान समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से हो। यदि कोई अधिकारी किसी शिकायत को बिना ठोस कारण के लंबित रखता है, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा।” उन्होंने डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से शिकायतों की प्रगति की निगरानी करने के भी निर्देश दिए।
डीआईजी का निर्देश: पीड़ितों को न्याय ही प्राथमिकता
पुलिस मामलों पर चर्चा करते हुए डीआईजी ने कहा कि चौरी चौरा तहसील क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि छोटे विवादों को समाधान दिवस के माध्यम से ही सुलझा लिया जाए ताकि वे बड़े अपराध का रूप न लें। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों की शिकायतों पर संवेदनशीलता दिखाने को कहा।
जनता से अपील: निर्भीक होकर रखें अपनी बात
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने चौरी चौरा तहसील के नागरिकों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं को लेकर किसी बिचौलिए के पास न जाएं, बल्कि समाधान दिवस जैसे मंचों का उपयोग करें। यह मंच आम जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को कम करने के लिए बनाया गया है।
निष्कर्ष
मंडलायुक्त और डीआईजी जैसे उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों का चौरी चौरा तहसील में खुद मौजूद होना यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार जनसमस्याओं के समाधान को लेकर कितनी गंभीर है। इस पहल से न केवल स्थानीय समस्याओं का निराकरण हुआ, बल्कि जनता में प्रशासन के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी गया। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि निचले स्तर के अधिकारी इन निर्देशों का कितनी तत्परता से पालन करते हैं।
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