गोरखपुर: 07 फरवरी 2026
गोरखपुर की सदर तहसील में शनिवार को आयोजित सदर तहसील दिवस जनसमस्याओं के समाधान का एक सशक्त मंच साबित हुआ। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर दीपक गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के कोने-कोने से आए फरियादियों ने अपनी समस्याओं को प्रशासन के सम्मुख रखा। प्रशासनिक मुस्तैदी का आलम यह रहा कि प्राप्त कुल 156 प्रार्थना पत्रों में से 20 गंभीर मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण कर दिया गया, जिससे कई परिवारों को वर्षों पुरानी उलझनों से राहत मिली।

समस्याओं का अंबार: राजस्व और अतिक्रमण के सर्वाधिक मामले
सदर तहसील सभागार में आयोजित इस सदर तहसील दिवस के दौरान फरियादियों ने विविध श्रेणियों की शिकायतें दर्ज कराईं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मामले राजस्व विभाग और भूमि विवाद से संबंधित रहे। फरियादियों ने निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे उठाए:
- सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा: ग्रामीणों ने चकरोड, पोखरी और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर दबंगों द्वारा किए गए अतिक्रमण की शिकायत की।
- पैमाइश और निशानदेही: कई फरियादियों का आरोप था कि राजस्व टीम द्वारा पैमाइश किए जाने के बाद विपक्षी दलों द्वारा जानबूझकर निशान मिटा दिए जाते हैं।
- निर्माण कार्यों में अवरोध: निजी भूमि पर निर्माण के दौरान पड़ोसियों द्वारा डाली जा रही बाधाओं के मामले भी प्रमुखता से आए।
- पुराने आदेशों की अनदेखी: कई शिकायतों में यह बात सामने आई कि पूर्व में अधिकारियों द्वारा आदेश दिए जाने के बावजूद निचले स्तर पर उन पर अमल नहीं किया गया।
एसडीएम दीपक गुप्ता का सख्त रुख: ‘अनावश्यक दौड़ न लगाए जनता’
सभी मामलों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करते हुए एसडीएम दीपक गुप्ता ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदर तहसील दिवस का उद्देश्य केवल कागजी खानापूर्ति करना नहीं, बल्कि जनता को वास्तविक न्याय दिलाना है। एसडीएम ने कहा, “फरियादियों को अपनी एक ही समस्या के लिए बार-बार तहसील के चक्कर नहीं लगाने चाहिए। हर प्रार्थना पत्र पर पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।”
उन्होंने विशेष रूप से उन मामलों पर नाराजगी जताई जहाँ पूर्व में आदेश पारित होने के बावजूद कार्रवाई लंबित थी। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से ऐसे आदेशों पर अमल सुनिश्चित कराने को कहा।
पुलिस और राजस्व की संयुक्त कार्रवाई पर जोर
जमीन और रास्ते के विवाद अक्सर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा कर देते हैं। इसे देखते हुए एसडीएम ने सदर तहसील दिवस में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि जहाँ कहीं भी राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम की आवश्यकता है, वहाँ समन्वय बनाकर तत्काल मौके पर जाया जाए। उन्होंने पोखरी, रास्ते और सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे को गंभीर अपराध मानते हुए भू-माफियाओं के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों की उपस्थिति और त्वरित कार्यवाही
इस जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक टीम पूरी तरह सक्रिय दिखी। एसडीएम के साथ नायब तहसीलदार नीरू सिंह और नायब तहसीलदार आकांक्षा पासवान सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रार्थियों से सीधे संवाद कर उनके दावों की पुष्टि की और कई मामलों में फोन पर ही संबंधित लेखपालों और सचिवों को दिशा-निर्देश दिए।
मौके पर मिला समाधान: ग्रामीणों ने जताई खुशी
सदर तहसील दिवस में पहुंचे 20 ऐसे मामले थे जिन्हें मौके पर ही सुलझा लिया गया। इनमें मुख्य रूप से आपसी सहमति से रास्ते का विवाद सुलझाना, गलत पैमाइश की तत्काल सुधार और छोटे-मोटे विवाद शामिल थे। तत्काल राहत मिलने से फरियादियों के चेहरों पर संतोष देखा गया। शेष 136 मामलों को समयबद्ध कार्रवाई की चेतावनी के साथ संबंधित विभागों को सौंप दिया गया है।
निष्कर्ष
गोरखपुर में आयोजित यह सदर तहसील दिवस सुशासन की दिशा में एक प्रभावी कदम है। एसडीएम दीपक गुप्ता द्वारा जनसमस्याओं के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता और कड़ाई यह सुनिश्चित करती है कि आने वाले समय में सदर तहसील क्षेत्र में भ्रष्टाचार और टालमटोल की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी। हालांकि, 156 में से केवल 20 मामलों का निस्तारण यह याद दिलाता है कि राजस्व तंत्र को अभी और भी गति पकड़ने की आवश्यकता है।
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