नई दिल्ली: 03 फरवरी 2026
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों के एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया बातचीत के बाद जिस ट्रेड डील की घोषणा की गई, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस समझौते को लेकर भारतीय किसानों और डेयरी संचालकों के मन में जो चिंताएं थीं, उन्हें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पूरी तरह से दूर कर दिया है।
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों (Sensitive Sectors) जैसे कृषि और डेयरी को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है और इन्हें समझौते की शर्तों से बाहर रखा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रखा किसानों का मान
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी दोस्ती और व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल करते हुए एक ऐसी डील फाइनल की है जो भारत के हित में है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी सेक्टर को संभाला है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि इस समझौते का भारतीय किसानों की आय और उनके भविष्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।”
मंत्री ने आगे बताया कि भारत के प्रतिस्पर्धी देशों (जैसे वियतनाम या ब्राजील) की तुलना में भारत को अमेरिका से जो डील मिली है, वह सबसे बेहतरीन है।
टैरिफ में बड़ी कटौती: निर्यातकों की बल्ले-बल्ले
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलने वाला है। अब तक अमेरिका भारतीय उत्पादों पर जो 25% से 50% तक का भारी ‘रेसिप्रोकल’ (जवाबी) टैरिफ लगा रहा था, उसे घटाकर अब 18% कर दिया गया है। इसके साथ ही कुछ खास क्षेत्रों में टैरिफ को पूरी तरह से हटा दिया गया है। इसका सीधा फायदा:
- कपड़ा और परिधान (Textiles & Apparels)
- रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery)
- इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो कंपोनेंट्स
- लेदर और फुटवियर सेक्टर को मिलेगा।

500 अरब डॉलर की बड़ी खरीदारी का रोडमैप

राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की थी कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक और कृषि उत्पादों सहित लगभग 500 अरब डॉलर के सामान की खरीद करेगा। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए गोयल ने कहा कि यह खरीद धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से होगी। इसमें अमेरिका से उच्च गुणवत्ता वाले डेटा सेंटर (Data Centers) उपकरण, विमान के पुर्जे और आधुनिक तकनीक शामिल होगी, जिससे भारत की डिजिटल क्षमता में इजाफा होगा।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पाद वे होंगे जो भारत में पैदा नहीं होते या जिनकी हमें तकनीकी आवश्यकता है, जिससे हमारे घरेलू किसानों के बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
विरोधियों पर वार: सुशासन बनाम नकारात्मकता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीयूष गोयल ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब पूरा देश और उद्योग जगत इस ऐतिहासिक समझौते का स्वागत कर रहा है, तब कुछ लोग केवल ‘नकारात्मक राजनीति’ कर रहे हैं। गोयल ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह समझौता Atmanirbhar Bharat और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति देने वाला है।
तकनीक और निवेश का नया द्वार
इस ट्रेड डील के बाद अमेरिका से भारत में भारी निवेश की उम्मीद है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, एआई और रक्षा क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम करेंगे। पीयूष गोयल ने कहा कि यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह दो बड़े लोकतंत्रों के बीच आपसी भरोसे की जीत है। इससे भारत की MSME इकाइयों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा।
शेयर बाजार और रुपये में मजबूती
ट्रेड डील की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में भारी उछाल देखा गया। साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी काफी मजबूत हुआ है। उद्योग जगत के दिग्गजों का मानना है कि टैरिफ में कटौती से भारतीय कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
निष्कर्ष

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 2026 भारत की आर्थिक कूटनीति की एक बड़ी सफलता है। पीयूष गोयल के इस स्पष्टीकरण ने उन सभी आशंकाओं को खत्म कर दिया है कि विदेशी डेयरी उत्पाद भारतीय बाजारों में बाढ़ ला देंगे। भारत ने अपनी शर्तों पर यह समझौता किया है, जो देश की संप्रभुता और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखता है। आने वाले कुछ दिनों में दोनों देश एक ‘संयुक्त बयान’ जारी करेंगे, जिसमें इस समझौते के सभी तकनीकी पहलुओं का विस्तृत विवरण होगा।
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