बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 03 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में जमीनी और रास्तों के विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला गोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नुआंव से सामने आया है, जहाँ एक पुराने चबूतरे और सार्वजनिक रास्ते के अधिकार को लेकर दो पड़ोसियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात मारपीट और जान से मारने की धमकी तक पहुँच गई। इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और पीड़ित परिवार न्याय के लिए पुलिस की शरण में पहुँचा है।

विवाद की जड़: एक चबूतरा और रास्ता
घटना का विवरण देते हुए नुआंव निवासी पीड़ित जयनाथ गुप्ता, पुत्र स्व. रामअवध गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उनके घर के बगल में रहने वाले पड़ोसी रामप्रकाश राय के साथ काफी समय से चबूतरे और रास्ते को लेकर अनबन चल रही है। जयनाथ गुप्ता का आरोप है कि रामप्रकाश राय और उनका परिवार आए दिन चबूतरे की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश करता है।
विवाद उस समय और गहरा गया जब आरोपियों ने चबूतरे पर खेती के उपकरण (हल) रखकर उसे स्थाई रूप से घेरने का प्रयास किया। ग्रामीण इलाकों में चबूतरे का उपयोग अक्सर सामाजिक बैठकों या अनाज सुखाने के लिए किया जाता है, लेकिन यहाँ इसे वर्चस्व की लड़ाई बना दिया गया।
24 जनवरी की हिंसक घटना
तहरीर के अनुसार, विवाद ने हिंसक रूप बीते 24 जनवरी को लिया। आरोप है कि रामप्रकाश राय, उनकी पुत्री किरन राय और पुत्र संपूर्णन राय ने जयनाथ गुप्ता के परिवार को घेर लिया। गाली-गलौज और अभद्रता से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते मारपीट में बदल गया।
पीड़ित जयनाथ का दावा है कि आरोपियों ने न केवल उन्हें भद्दी गालियां दीं, बल्कि उनके पुत्र महाशंकर गुप्ता के साथ भी मारपीट की। आरोप यह भी है कि इस दौरान आरोपियों ने पीड़ित परिवार को गांव छोड़ने या जान से मारने की धमकी दी, जिससे परिवार दहशत में है।
[Image showing a rural village dispute scene with people arguing near a house entrance]
पुलिस की कार्रवाई और बीएनएस की धाराएं
घटना के कई दिनों बाद, जब मामला स्थानीय स्तर पर नहीं सुलझा, तो पीड़ित ने गोला थाने में लिखित तहरीर दी। गोला पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। थाना प्रभारी के निर्देश पर तीनों नामजद आरोपियों—रामप्रकाश राय, किरन राय और संपूर्णन राय के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

पुलिस ने निम्नलिखित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है:
- धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के लिए सजा।
- धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना।
- धारा 351(3): जान से मारने की धमकी या आपराधिक धमकी।
- धारा 329(3) व 324(4): संपत्ति से जुड़े विवाद और जबरन कब्जे के प्रयास से संबंधित कानूनी प्रावधान।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते भूमि विवाद: एक चुनौती
गोरखपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में Land Dispute in Uttar Pradesh की समस्या काफी पुरानी है। अक्सर छोटे-छोटे चबूतरे या ‘मेड़’ के विवाद खूनी संघर्ष का रूप ले लेते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार और Uttar Pradesh Police ने ‘थाना समाधान दिवस’ और ‘तहसील दिवस’ जैसे मंचों के जरिए इन विवादों को सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन नुआंव जैसी घटनाएं बताती हैं कि धरातल पर अभी भी काफी काम करना बाकी है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में राजस्व विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि समय रहते चबूतरे और रास्ते की पैमाइश करा दी गई होती, तो शायद मारपीट की नौबत नहीं आती।
पड़ोसियों के बीच बढ़ती कटुता
नुआंव की यह घटना केवल एक कानूनी मामला नहीं है, बल्कि यह गांवों में खत्म होते आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है। जहाँ कभी लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होते थे, आज महज चंद फीट जमीन के लिए एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू हैं। इस विवाद में महिलाओं और युवाओं की संलिप्तता और भी चिंताजनक है, जैसा कि इस मामले में किरन राय और संपूर्णन राय के नाम आने से स्पष्ट होता है।
निष्कर्ष
फिलहाल, गोला पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश और मामले की विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस गश्त भी कर रही है। अब यह देखना होगा कि राजस्व विभाग इस विवादित चबूतरे और रास्ते का क्या समाधान निकालता है, ताकि भविष्य में ऐसी हिंसक पुनरावृत्ति न हो।
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