गोरखपुर/नई दिल्ली: 03 फरवरी 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ का सपना अब उत्तर प्रदेश के गांवों की पगडंडियों से होता हुआ ग्राम सचिवालयों तक पहुँच चुका है। इसका सबसे बड़ा और सफल उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद गोरखपुर बनकर उभरा है। हाल ही में लोकसभा सत्र के दौरान गोरखपुर के लोकप्रिय सांसद रवि किशन शुक्ला द्वारा पूछे गए एक महत्वपूर्ण सवाल ने देश का ध्यान इस ओर खींचा है कि कैसे तकनीक ने ग्रामीण शासन व्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। केंद्र सरकार ने सदन में आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि गोरखपुर की सभी ग्राम पंचायतें अब पूरी तरह से डिजिटल हो चुकी हैं।

ई-ग्रामस्वराज से पारदर्शी हुआ पंचायतों का हिसाब
लोकसभा में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने रवि किशन के प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि गोरखपुर जिले की सभी ग्राम पंचायतों को ई-ग्रामस्वराज (e-GramSwaraj) पोर्टल के साथ पूरी तरह एकीकृत कर दिया गया है। अब पंचायतों में होने वाला एक-एक पैसे का लेनदेन ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था (PFMS) के माध्यम से हो रहा है।
पहले ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें आम थीं, लेकिन अब डिजिटल गवर्नेंस ने भ्रष्टाचार के रास्ते बंद कर दिए हैं। ई-ग्रामस्वराज–PFMS इंटरफेस के कारण अब बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे वेंडरों और लाभार्थियों के खातों में राशि ट्रांसफर की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में अभूतपूर्व तेजी आई है।
प्रशिक्षण और तकनीक का संगम
यह डिजिटल क्रांति रातों-रात नहीं आई है। इसके पीछे National Gram Swaraj Abhiyan (RGSA) के तहत चलाए गए व्यापक प्रशिक्षण अभियान का बड़ा हाथ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश के 2.61 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को विशेष डिजिटल ट्रेनिंग दी गई है।
इसमें मुख्य रूप से:
- GIS/मैप आधारित योजना निर्माण: अब गांव की नालियों और सड़कों का खाका सैटेलाइट मैपिंग के जरिए तैयार होता है।
- MIS प्रणाली: योजनाओं की प्रगति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग।
- डिजिटल सिग्नेचर: ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर से काम में पारदर्शिता आई है।
योगी मॉडल: सुशासन की नई मिसाल
केंद्र सरकार ने सदन को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब डिजिटल गवर्नेंस का रोल मॉडल बन चुका है। गोरखपुर की पंचायतों में अब न केवल वित्तीय लेनदेन बल्कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल और अन्य जरूरी सेवाएं भी ऑनलाइन मिल रही हैं। इससे ग्रामीण जनता को अब छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
मुख्यमंत्री की ‘सख्त मॉनिटरिंग’ नीति ने यह सुनिश्चित किया है कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। पंचायतों की जवाबदेही तय होने से विकास कार्यों की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार देखा गया है।
सांसद रवि किशन ने जताया आभार
सदन में केंद्र सरकार के जवाब पर संतोष व्यक्त करते हुए सांसद रवि किशन शुक्ला ने इसे मोदी-योगी सरकार की साझा जीत बताया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया की दूरदर्शी सोच और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल के कारण ही आज मेरे गोरखपुर की ग्राम पंचायतें पारदर्शी और सशक्त बनी हैं। अब गांव का पैसा सीधे गांव के विकास में लग रहा है।”
सांसद ने यह भी जोड़ा कि डिजिटल पंचायत व्यवस्था से न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि यह ग्रामीण युवाओं के लिए तकनीक से जुड़ने के नए अवसर भी पैदा कर रही है।
भविष्य की ओर कदम: देश के लिए बनेगा ‘गोरखपुर मॉडल’
विशेषज्ञों का मानना है कि गोरखपुर में लागू की गई यह शत-प्रतिशत डिजिटल व्यवस्था अब देश के अन्य जिलों के लिए एक ‘बेंचमार्क’ (आदर्श) बन सकती है। जब एक बड़े जिले की सभी पंचायतें तकनीक को अपना सकती हैं, तो यह पूरे भारत के लिए संभव है। यह पहल प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की दिशा में एक बहुत मजबूत आधार तैयार कर रही है।

प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ने से अब ग्रामीणों का भरोसा शासन तंत्र पर और मजबूत हुआ है। आने वाले समय में इन पंचायतों में हाई-स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई जोन की सुविधा को और विस्तार दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी डिजिटल मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
गोरखपुर की पंचायतों का डिजिटल होना महज एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण स्वावलंबन की एक नई कहानी है। जहाँ कभी फाइलों का ढेर लगा रहता था, वहां अब कंप्यूटर की एक क्लिक पर गांव का भविष्य तय हो रहा है। सांसद रवि किशन का यह सवाल और केंद्र का जवाब इस बात की तस्दीक करता है कि अब गोरखपुर का विकास पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि डिजिटल रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
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