बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोला बाजार, गोरखपुर: 30 जनवरी 2026
राजनीति में पद और प्रतिष्ठा तो बहुत लोग पाते हैं, लेकिन अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर कार्यकर्ताओं के दिलों में जगह बनाना विरले ही कर पाते हैं। गोरखपुर के गोला क्षेत्र में समाजवादी विचारधारा की लौ जलाने वाले एक ऐसे ही कद्दावर नेता थे स्व. रामलखन गोंड़। आज उनकी तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर गोला उपनगर के पाण्डेयपार उर्फ डड़वापार चौराहे पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में उन्हें याद किया गया। क्षेत्र के दिग्गज नेताओं ने शिरकत कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके द्वारा किए गए संघर्षों को याद किया।

रामलखन गोंड़: सेक्टर अध्यक्ष से जिला सचिव तक का सफर
स्व. रामलखन गोंड़ केवल एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष का एक पर्याय थे। वे एक गौरवशाली विरासत के उत्तराधिकारी थे; वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. जगेलु प्रसाद के पौत्र थे। देशभक्ति और समाज सेवा उनके खून में थी। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत समाजवादी पार्टी के एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में की थी।
सपा के वरिष्ठ नेता और बांसगांव विधानसभा अध्यक्ष रामनिरंजन यादव (पहलवान) ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा, “रामलखन गोंड़ जी समाजवाद के सच्चे प्रहरी थे। उन्होंने सेक्टर अध्यक्ष की छोटी सी जिम्मेदारी से शुरुआत की, फिर विधानसभा अध्यक्ष बने और अंततः जिला सचिव के पद तक पहुंचे। यह सफर उनके अथक परिश्रम और पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा का प्रमाण है।”
खांटी समाजवादी और जुझारू व्यक्तित्व
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे चिल्लूपार विधानसभा उपाध्यक्ष अरुण कुमार यादव ने रामलखन जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें ‘खांटी समाजवादी’ बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब राजनीति अक्सर स्वार्थ की धुरी पर घूमती है, रामलखन गोंड़ ने हमेशा गरीब, वंचित और शोषित वर्ग की आवाज को बुलंद किया। सपा की हर लड़ाई में वे सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आते थे।
समाजवाद और भारतीय राजनीति में इसका महत्व
Socialism या समाजवाद भारत के लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण धुरी रहा है। रामलखन गोंड़ जैसे नेताओं ने डॉ. राम मनोहर लोहिया और मुलायम सिंह यादव के विचारों को गांव-गांव तक पहुँचाने का काम किया। पाण्डेयपार जैसे ग्रामीण इलाकों में समाजवादी विचारधारा को मजबूती देना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन रामलखन जी ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा से इसे मुमकिन बनाया।
एक भावुक विदाई और विरासत की जिम्मेदारी
श्रद्धांजलि सभा का माहौल उस समय भावुक हो गया जब स्व. रामलखन गोंड़ के पुत्र और उभरते सपा नेता अभिषेक गोंड़ ने अपने पिता की यादों को साझा किया। अभिषेक ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पिता का जीवन हमेशा समाज के लिए समर्पित रहा और वे उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लेते हैं।
क्षेत्रीय राजनीति पर प्रभाव
गोला और बांसगांव का इलाका हमेशा से राजनीतिक रूप से जागरूक रहा है। रामलखन गोंड़ ने इस क्षेत्र में न केवल Samajwadi Party को संगठनात्मक रूप से मजबूत किया, बल्कि जाति-पाति से ऊपर उठकर लोगों की मदद की। उनकी पुण्यतिथि पर उमड़ी भारी भीड़ इस बात का गवाह थी कि उनके जाने के तीन साल बाद भी लोगों के दिलों में उनके प्रति सम्मान कम नहीं हुआ है।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ समाजवादी नेता नरसिंह यादव ने किया। उनकी ओजस्वी वाणी ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया। कार्यक्रम के दौरान ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, रामलखन तेरा नाम रहेगा’ जैसे नारों से डड़वापार चौराहा गूंज उठा।
इन दिग्गजों की रही मौजूदगी
इस गौरवमयी अवसर पर समाजवादी विचारधारा से जुड़े कई महत्वपूर्ण चेहरे मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से:
- दीपक बौद्ध (क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता)
- पूर्णमासी गोंड़ और शिवानंद यादव
- हरेराम यादव और सूबेदार यादव
- दिनेश कन्नौजिया और कादिर अंसारी
- प्रमोद कुमार गोंड़, विवेकानंद गोंड़ और अच्युतानंद गोंड़
उपस्थित सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि रामलखन गोंड़ के अधूरे सपनों को पूरा करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
निष्कर्ष
स्व. रामलखन गोंड़ का जीवन वर्तमान पीढ़ी के राजनेताओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने सिखाया कि कैसे बिना किसी बड़े शोर-शराबे के, जमीन पर रहकर संगठन के लिए काम किया जाता है। गोरखपुर की राजनीति में उनका योगदान हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उनकी तीसरी पुण्यतिथि केवल एक याद नहीं, बल्कि समाजवादी मूल्यों को फिर से जीवित करने का एक संकल्प दिवस बनकर उभरी।
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