गोरखपुर जनपद में निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) को सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। इस अभियान के अंतर्गत प्रशासन ने लगभग 2 लाख 83 हजार परिवारों को नोटिस जारी किए हैं, जिससे मतदाताओं के बीच कुछ भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी।
मतदाताओं की इसी घबराहट को दूर करने के लिए एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने बताया कि यह नोटिस केवल उन मतदाताओं को भेजे गए हैं जिनका नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज है या जो अपने पुराने पते से कहीं और स्थानांतरित हो चुके हैं।

नोटिस मिलने पर न घबराएं मतदाता: क्या है नियम?
प्रशासन की ओर से यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि किसी मतदाता का नाम दो या उससे अधिक स्थानों पर दर्ज पाया जाता है, तो उसे केवल एक ही स्थान का वैध मतदाता माना जाएगा। निर्वाचन आयोग का मुख्य उद्देश्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू करना है।
मुख्य बिंदु जो मतदाताओं को जानने आवश्यक हैं:
- नाम सुरक्षा: यदि आपने एक स्थान से एसआईआर (SIR) फॉर्म भर दिया है, तो आपका नाम उस स्थान पर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
- नोटिस का जवाब: यदि आपको दूसरे स्थान से नोटिस प्राप्त हुआ है, तो आप उसका जवाब दे सकते हैं। यदि आप जवाब नहीं भी देते हैं, तब भी आपका नाम पूरी तरह से नहीं कटेगा।
- नाम विलोपन की प्रक्रिया: नोटिस का जवाब न मिलने की स्थिति में प्रशासन केवल उस स्थान से नाम हटाएगा जहाँ से आपने एसआईआर फॉर्म नहीं भरा है। आपका मताधिकार उसी स्थान पर सुरक्षित रहेगा जहाँ आप वर्तमान में निवास कर रहे हैं और जहाँ से आपने फॉर्म भरा है।
तहसील सभागार में विशेष समाधान केंद्र

मतदाताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए गोरखपुर तहसील सदर सभागार में विशेष व्यवस्था की गई है। यहाँ प्रशासन ने पीठासीन अधिकारियों और विभागीय विशेषज्ञों की एक टीम तैनात की है जो मौके पर ही शंकाओं का समाधान कर रही है।
अधिकारियों की निगरानी में समाधान: तहसील सदर सभागार में पीठासीन अधिकारी/एसीएम प्रशांत वर्मा, तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह और नायब तहसीलदार अरविंद नाथ सिंह सहित पूरी टीम सक्रिय है। यहाँ मतदाताओं को फॉर्म भरने और नोटिस का जवाब देने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि यदि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की किसी मानवीय त्रुटि के कारण किसी पात्र मतदाता का नाम कट गया है, तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है।
फॉर्म-6 के माध्यम से पुनः जुड़वाएं नाम
यदि किसी मतदाता का नाम गलती से सूची से हट गया है, तो वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करा सकते हैं। यह फॉर्म नए मतदाताओं और उन लोगों के लिए है जिनका नाम सूची में शामिल नहीं है। मतदान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) है, और प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी पात्र नागरिक इस अधिकार से वंचित न रहे।
एसडीएम सदर दीपक गुप्ता की अपील
एसडीएम सदर ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य मतदाताओं को परेशान करना नहीं, बल्कि एक सटीक और भरोसेमंद मतदाता सूची तैयार करना है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मतदाता स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ है, तो उसके परिवार का कोई भी सदस्य नोटिस का जवाब दाखिल कर सकता है। प्रशासन की प्राथमिकता एक ऐसी पारदर्शी सूची तैयार करना है जिससे भविष्य में चुनाव प्रक्रिया सुचारु और निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सके।
निष्कर्ष: सशक्त लोकतंत्र की ओर एक कदम
निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जा रहा यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। एक शुद्ध मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की नींव होती है। गोरखपुर प्रशासन द्वारा तहसील स्तर पर की गई व्यवस्थाएं और अधिकारियों का सक्रिय दृष्टिकोण सराहनीय है। मतदाताओं को चाहिए कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और अपने मताधिकार को सुरक्षित करने के लिए जागरूक बनें।
read more news: गोला के लोकप्रिय समाजसेवी संजय मिश्रा का असामयिक निधन, मिश्रौली गाँव में पसरा सन्नाटा













