गोरखपुर जनपद के गोला उपनगर में मानवता और कानून-व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक युवक के साथ सरेआम मारपीट करने और उसे बाइक से पीछा कर पकड़ने के बाद बेरहमी से घसीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना 24 जनवरी की शाम करीब 5:20 बजे की बताई जा रही है, जिसका सीसीटीवी फुटेज अब सार्वजनिक होने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस प्रकार एक निहत्थे युवक को बाइक सवार और पैदल हमलावरों ने घेरकर कानून को अपने हाथ में लिया।
क्या है पूरा मामला: चोरी का शक और ‘मार्ट’ कर्मियों की दबंगई
मामले की गहराई से पड़ताल करने पर पीड़ित की पहचान प्रिंस साहनी पुत्र दौलत साहनी के रूप में हुई है। प्रिंस मूल रूप से गोला का ही रहने वाला है (ननिहाल)। घटना की शुरुआत गोला स्थित एक नामचीन ‘मार्ट’ से हुई।
आरोप है कि प्रिंस जब मार्ट में खरीदारी करने गया था, तभी वहाँ के कर्मचारियों ने उस पर चोरी का संदेह जताया। इसके बाद बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या पुलिस को सूचना दिए, कर्मचारियों ने खुद ही फैसला सुनाते हुए प्रिंस के साथ मारपीट शुरू कर दी। प्रिंस अपनी जान बचाकर वहाँ से भागा, लेकिन मार्ट के कर्मचारी बाइक और पैदल ही उसका शिकार करने निकल पड़े।
वायरल वीडियो की भयावहता:
- फिल्मी अंदाज में पीछा: चंद चौराहे के पास एक बाइक पर सवार तीन युवकों ने प्रिंस को दौड़ाया। बाइक के बीच में बैठे युवक ने चलती गाड़ी से प्रिंस की गर्दन दबोच ली।
- बर्बरता की हद: इसके बाद पीछे से आए चार अन्य लोगों ने प्रिंस को जमीन पर गिरा दिया और लात-घूंसों से उसकी मारपीट की।
- सड़क पर घसीटा: वीडियो में दिख रहा है कि युवक को पीटने के बाद उसे अपराधियों की तरह सड़क पर घसीटते हुए वापस ले जाया गया।
रसूख का दबाव और पुलिसिया कार्यवाही
सूत्रों के अनुसार, जिस मार्ट के कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप लगा है, वह इलाक़े के एक प्रभावशाली व्यक्ति से संबंधित है। यही कारण है कि घटना के बाद मामले को रफा-दफा करने और पीड़ित पर ही दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी। पीड़ित प्रिंस साहनी ने पुलिस को लिखित तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई है। उसने स्पष्ट किया है कि उसे जानबूझकर फंसाया गया और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा: वायरल वीडियो बना सबूत
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और जन-आक्रोश बढ़ने के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई है। गोला थाना पुलिस ने इस प्रकरण में संज्ञान लेते हुए सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन सभी चेहरों की पहचान कर रही है जिन्होंने कानून को हाथ में लिया और युवक के साथ मारपीट की।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या निजी संस्थान के कर्मचारी को यह अधिकार नहीं है कि वे किसी संदिग्ध के साथ खुद मारपीट करें। यदि चोरी का मामला था, तो नियमानुसार पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए थी।
निष्कर्ष: भीड़ तंत्र पर लगाम जरूरी
गोला की यह घटना दर्शाती है कि समाज में ‘भीड़ तंत्र’ (Mob Justice) किस कदर हावी हो रहा है। रसूखदार संस्थानों के कर्मचारी यदि खुद को कानून से ऊपर समझेंगे, तो आम नागरिक की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। इस वायरल वीडियो ने प्रशासन को यह संदेश दिया है कि निष्पक्ष जांच ही जनता का विश्वास बहाल कर सकती है। अब क्षेत्र की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

















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