बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के क्रम में प्रत्येक शनिवार को थानों पर आयोजित होने वाला समाधान दिवस (Samadhan Divas) गोरखपुर के गोला थाने पर केवल औपचारिकताओं तक सीमित नजर आया। शनिवार, 24 जनवरी को थानाध्यक्ष राकेश रोशन की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे थे। विशेषकर राजस्व और भूमि विवाद से संबंधित मामलों की भरमार रही, लेकिन राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण निस्तारण की प्रक्रिया शून्य रही।
यह स्थिति शासन की उस मंशा पर सवाल उठाती है, जिसके तहत जनता को त्वरित और प्रभावी न्याय दिलाने के लिए तहसील और थाने पर संयुक्त समाधान दिवस की व्यवस्था की गई है।

राजस्व विभाग की बेरुखी: फरियादियों की बढ़ी मुश्किलें
समाधान दिवस पर आए अधिकतर मामले जमीन की पैमाइश, अवैध कब्जे और वरासत से जुड़े थे। इन प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए तहसीलदार या नायब तहसीलदार जैसे सक्षम अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य होती है।
- अधिकारियों का अभाव: बैठक में राजस्व विभाग की ओर से केवल राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) ही उपस्थित रहे। किसी भी प्रथम श्रेणी या सक्षम मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी के न होने से जटिल मामलों पर कोई विधिक निर्णय नहीं लिया जा सका।
- निराश लौटे ग्रामीण: दूर-दराज के गांवों से किराया खर्च कर और अपना समय निकालकर आए फरियादी दिन भर इंतजार करने के बाद निराश होकर वापस लौट गए। उनका कहना था कि जब अधिकारी ही नहीं होंगे, तो समाधान कैसे निकलेगा?
थानाध्यक्ष की सक्रियता, पर राजस्व टीम का अधूरा सहयोग
थानाध्यक्ष राकेश रोशन ने अपनी ओर से पुलिस विभाग से जुड़े मामलों को सुनने का प्रयास किया और शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। हालांकि, समाधान दिवस की आत्मा राजस्व और पुलिस के संयुक्त समन्वय में बसी है। थानाध्यक्ष की मौजूदगी के बावजूद, राजस्व विभाग की टीम की ओर से सक्षम नेतृत्व की कमी ने इस आयोजन को बेअसर बना दिया।
मौके पर राजस्व निरीक्षक पृथ्वीनाथ गुप्ता, चंद्रमणि चौरसिया और गिरिजेश यादव उपस्थित रहे। साथ ही राजस्व कर्मी अवधेश लाल श्रीवास्तव, अजय पाठक, उमेश कुमार, मुन्नालाल, रामाश्रय और अनूप तिवारी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन नीतिगत निर्णय लेने की शक्ति न होने के कारण वे भी फरियादियों को केवल आश्वासन ही दे सके।
निस्तारण का आंकड़ा रहा ‘शून्य’
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस समाधान दिवस पर जितने भी नए प्रार्थना पत्र आए, उनमें से एक भी मामले का मौके पर निस्तारण नहीं किया जा सका। अधिकारियों की अनुपस्थिति और पुराने मामलों की पेंडेंसी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। गोला थाने के एसआई और पुलिस स्टाफ ने अभिलेखों को सूचीबद्ध तो किया, लेकिन बिना राजस्व विभाग की सक्रियता के मौके पर जाकर पैमाइश या कब्जे हटाने जैसी कार्रवाई मुमकिन नहीं हो पाई।
निष्कर्ष: क्या केवल रोस्टर तक सीमित रहेगी जनसुनवाई?
समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य ‘थाना-तहसील’ के चक्करों से जनता को मुक्ति दिलाना है। लेकिन गोला थाने की यह स्थिति दर्शाती है कि प्रशासनिक समन्वय में कमी के कारण जनता का भरोसा इन संस्थानों से कम हो सकता है। उच्चाधिकारियों को चाहिए कि वे रोस्टर के अनुसार अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि समाधान दिवस अपने वास्तविक उद्देश्यों को प्राप्त कर सके।













