यह रिपोर्ट बृजनाथ तिवारी की लिखी हुई है
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के नगर पंचायत उरुवा बाजार में विकास कार्यों की चर्चा के लिए बुलाई गई बोर्ड बैठक गुरुवार को अखाड़े में तब्दील हो गई। बैठक के दौरान सभासदों और अधिशासी अधिकारी (EO) के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद नगर पंचायत प्रशासन ने पुलिस शरण ली है। आरोप है कि सभासदों ने न केवल सरकारी अभिलेखों को छीनने का प्रयास किया, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ जमकर अभद्रता (Indecent Behavior) की और उन्हें डराने-धमकाने के लिए पिस्टल तक का सहारा लिया।

इस घटना के बाद नगर पंचायत कार्यालय में तनाव व्याप्त है और कर्मचारियों ने सुरक्षा की मांग करते हुए कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
बैठक के दौरान विवाद की शुरुआत
22 जनवरी 2026 को दोपहर 12 बजे नगर पंचायत सभागार में पूर्व निर्धारित एजेंडे पर चर्चा के लिए बोर्ड बैठक आहूत की गई थी। बैठक शुरू होते ही वार्ड संख्या-12 के सदस्य भीम सिंह (उर्फ अतुल) ने सभागार में पारदिर्शता के लिए चल रही वीडियो रिकॉर्डिंग को जबरन बंद करा दिया। विवाद तब और गहरा गया जब सभासदों ने मांग की कि अधिशासी अधिकारी स्वयं कार्यवाही रजिस्टर लेकर उनके पास आएं।
कर्मचारियों से मारपीट और अभिलेखों की छीना-झपटी
अधिशासी अधिकारी और नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, बैठक में मौजूद वार्ड संख्या-05 के त्रिलोकी नाथ यादव, वार्ड संख्या-09 के बृजेंद्र पाल सिंह और वार्ड संख्या-12 के भीम सिंह ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं।
- अभिलेखों की लूट: कार्यालय कर्मियों से कार्यवाही रजिस्टर, उपस्थिति रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज बलपूर्वक छीन लिए गए।
- शारीरिक हमला: आरोप है कि सभासदों ने एक कर्मचारी का कॉलर पकड़कर उसे धक्का दिया और उसके पद की गरिमा का अपमान करते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
- धमकी भरा व्यवहार: कर्मचारियों को कमरे में बंद करने और बाहर निकलने पर पीटने की धमकी दी गई।

पिस्टल दिखाकर धमकाने का गंभीर आरोप
नगर पंचायत प्रशासन द्वारा दी गई तहरीर में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। आरोप लगाया गया है कि वार्ड संख्या-12 के सदस्य भीम सिंह पूर्व में भी कई बार अधिशासी अधिकारी के कक्ष में जाकर अपनी पिस्टल दिखाकर उन्हें धमका चुके हैं। इसके अलावा, वार्ड संख्या-05 के सदस्य त्रिलोकी नाथ यादव पर भी पूर्व में तत्कालीन ईओ के साथ अभद्रता करने और हत्या जैसे संगीन मामलों में संलिप्त रहने का आरोप है।
पुलिस प्रशासन की भूमिका और आगामी कार्रवाई
अधिशासी अधिकारी ने थाना प्रभारी उरुवा बाजार को सौंपे गए पत्र में मांग की है कि दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। प्रशासन का तर्क है कि यदि ऐसे तत्वों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो नगर पंचायत का सुचारु कार्य संचालन असंभव हो जाएगा।
पुलिस विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सभागार के सीसीटीवी फुटेज (यदि उपलब्ध हों) और वहां मौजूद अन्य चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। तथ्यों की पुष्टि होते ही आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
निष्कर्ष: विकास कार्यों पर लगा ग्रहण
नगर पंचायत उरुवा की यह घटना दर्शाती है कि निजी अहंकार और राजनीतिक रंजिश के कारण विकास के मुद्दे गौण हो जाते हैं। बोर्ड बैठक में अभद्रता और हिंसा का सहारा लेना न केवल जनमत का अपमान है, बल्कि सरकारी सेवा में लगे अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने वाला कृत्य है। स्थानीय नागरिकों ने भी इस घटना की निंदा की है और मांग की है कि नगर पंचायत को राजनीति का अखाड़ा बनाने के बजाय जनसमस्याओं के समाधान का केंद्र बनाया जाए।
Read more news: सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे का खेल: कैंट के सिंधडिया में 50 परिवारों का गला घोंटने की कोशिश














1 thought on “उरुवा नगर पंचायत में लोकतंत्र शर्मसार: बोर्ड बैठक में ईओ से अभद्रता और जान से मारने की धमकी”