उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंधडिया मोहल्ले में एक गंभीर भूमि विवाद सामने आया है। यहाँ वर्षों पुराने सार्वजनिक रास्ते को संकुचित कर उसे बंद करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे लगभग 50 से अधिक परिवारों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गुरुवार को इस समस्या से त्रस्त मोहल्लेवासियों ने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में एक प्रेस वार्ता कर अपना दुखड़ा सुनाया और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रसूख के बल पर एक व्यक्ति पूरे मोहल्ले की जीवनरेखा कहे जाने वाले रास्ते को हड़पने की कोशिश कर रहा है, जिससे क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है।

15 फीट का रास्ता अब महज 5 फीट: क्या है पूरा विवाद?
प्रेस वार्ता के दौरान सिंधडिया निवासी प्रदीप चौधरी ने बताया कि महादेव झारखंडी, टुकड़ा नंबर-1 स्थित गाटा संख्या 364 व 366 में उनका और दर्जनों अन्य परिवारों का पुश्तैनी मकान व सहन है। इस बस्ती के लोग पिछले कई दशकों से एक 15 फीट चौड़े सार्वजनिक रास्ते का उपयोग कर रहे थे।
विवाद तब शुरू हुआ जब कुंवर गौरव सिंह उर्फ प्रिंस सिंह नामक व्यक्ति ने उक्त भूमि पर अपना दावा पेश किया। प्रदीप चौधरी के अनुसार:
- रजिस्ट्री का हवाला: विपक्षी पक्ष का कहना है कि उक्त भूमि की रजिस्ट्री उनके नाम हो चुकी है और अब वे अपनी मर्जी से रास्ता तय करेंगे।
- जेसीबी का तांडव: हाल ही में जेसीबी मशीन लगाकर पहले से बनी बाउंड्री को तोड़ दिया गया और रास्ते की चौड़ाई को कम करना शुरू कर दिया गया।
- संकुचित मार्ग: पहले 15 फीट चौड़े रास्ते को अब केवल 5 से 8 फीट करने की बात कही जा रही है, जो कि व्यावहारिक रूप से असंभव है।
आपातकालीन सेवाओं पर संकट: मोहल्लेवासियों की चिंता
मोहल्लेवासियों का कहना है कि यदि रास्ता केवल 5 या 8 फीट का रह गया, तो यह उनके लिए किसी जेल से कम नहीं होगा।
- एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड: इतने संकरे रास्ते में आपात स्थिति के दौरान एम्बुलेंस या दमकल की गाड़ी नहीं घुस पाएगी, जिससे किसी भी अप्रिय घटना में जनहानि का खतरा बना रहेगा।
- चार पहिया वाहन: मोहल्ले के लोग अपने वाहन घरों तक नहीं ले जा पाएंगे, जिससे उनका दैनिक जीवन दूभर हो जाएगा।
- बुजुर्ग और बच्चे: संकरे रास्ते के कारण बच्चों और बुजुर्गों को आवागमन में भारी असुविधा हो रही है।
भू-माफिया (Land Mafia) जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग
प्रेस वार्ता में मौजूद बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने शासन-प्रशासन के विरुद्ध अपना रोष प्रकट किया। उन्होंने इस कृत्य को सुनियोजित तरीके से किया गया अवैध कब्जा करार दिया। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- निष्पक्ष जांच: कथित रजिस्ट्री और भूमि के मालिकाना हक की गहनता से जांच की जाए।
- यथावत बहाली: 15 फीट चौड़े पुराने रास्ते को मुक्त कराकर उसे पहले की तरह बहाल किया जाए।
- कठोर कार्रवाई: सार्वजनिक संपत्ति और रास्ते को नुकसान पहुँचाने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई हो।
निष्कर्ष: आंदोलन की चेतावनी
सिंधडिया मोहल्ले के निवासियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही हस्तक्षेप कर इस समस्या का समाधान नहीं निकाला, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। सार्वजनिक रास्तों पर इस तरह के अतिक्रमण शहर के शहरी नियोजन और सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती हैं। अब देखना यह है कि गोरखपुर प्रशासन इस ‘भू-माफिया’ शैली की कार्रवाई पर क्या संज्ञान लेता है।
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