यह रिपोर्ट बृजनाथ तिवारी की लिखी हुई है
गोरखपुर के दक्षिणांचल में स्थित गोला बाजार की धरती ने कई महापुरुषों को जन्म दिया है, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व उप शिक्षा मंत्री केशभान राय जी का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। सादगी, सरल भाषा, और मृदुल स्वभाव के धनी राय साहब एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिनमें ज्ञान की पिपासा और मानवता के प्रति गहरी संवेदना कूट-कूट कर भरी थी।

जन्म और प्रारंभिक शिक्षा
केशभान राय का जन्म 2 सितंबर 1916 को गोला-कौड़ीराम रोड पर स्थित ग्राम गोपलापुर में हुआ था। उनके पिता श्री उदित राय एक साधारण किसान थे और माता श्रीमती लखपत्ता देवी एक शालीन गृहिणी थीं। उनकी मेधा का परिचय उनकी शिक्षा से मिलता है:
- हाई स्कूल: 1935 में जॉर्ज इस्लामिया कॉलेज, गोरखपुर से प्रथम श्रेणी में।
- इंटरमीडिएट: 1937 में सेंट एंड्रयूज कॉलेज से।
- स्नातक: 1939 में आगरा विश्वविद्यालय से गणित, अंग्रेजी और दर्शनशास्त्र विषयों के साथ।
शिक्षा के प्रति अटूट प्रेम: आनन्द विद्यापीठ की स्थापना
केशभान राय जी का मानना था कि ‘ऋते ज्ञानान्न मुक्ति:’ यानी ज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं है। उन्होंने शिक्षा को समाज सेवा का माध्यम बनाया और 1939 में ‘आनन्द विद्यापीठ’ की स्थापना की। यह विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का अंकुर था। यहाँ छात्रों को शारीरिक श्रम, चरखा कातना, और दरी-मोढ़ा बनाने जैसी लघु दस्तकारी सिखाई जाती थी। सूत बेचकर होने वाली आय से गरीब छात्रों की फीस भरी जाती थी।
स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और संघर्ष
महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रभावित होकर केशभान राय ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंका।
- सविनय अवज्ञा: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर टेलीफोन के तार काट दिए।
- कुर्बानी: इस अपराध में अंग्रेजी सरकार ने 22 मार्च 1942 को उनका घर फूंक दिया। उनके पिता और भाई को जेल जाना पड़ा।
- जेल यात्रा: 1942 से 1945 के बीच वे कई बार जेल गए। गांधी जी के आह्वान पर उन्होंने अपना सर्वस्व देश को समर्पित कर दिया।
राजनीतिक जीवन: बांसगांव के प्रथम विधायक
आजादी के बाद केशभान राय ने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया:
- 1948: जिला परिषद सदस्य चुने गए।
- 1952: कांग्रेस के टिकट पर बांसगांव विधानसभा के प्रथम विधायक बने।
- 1957 और 1962: मगहर-सहजनवां क्षेत्र से विधायक रहे।
- मंत्री पद: 1962 में मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता के मंत्रिमंडल में उप शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया।
1976 में चुनाव हारने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया, जो उनके पद के प्रति अनासक्ति को दर्शाता है।
व्यक्तिगत आदर्श और सादगी
केशभान राय जी का जीवन “सादा जीवन, उच्च विचार” का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि “गुलाम देश में न तो शादी करूँगा और न ही जूता पहनूँगा।” उन्होंने आजीवन अविवाहित रहकर अपनी प्रतिज्ञा निभाई। धोती, कुर्ता, जैकेट और गांधी टोपी उनका प्रिय परिधान था। वे अपनी राजनीतिक पेंशन तक गरीबों और असहायों में बांट देते थे।
अंतिम समय और विरासत
अपने अंतिम दिनों में वे कैंसर जैसे गंभीर रोग से पीड़ित रहे। लखनऊ पीजीआई में इलाज के बाद, वे अपनी इच्छा से अपने पैतृक गांव गोपलापुर लौट आए। 12 फरवरी 1991 को इस महान आत्मा ने अंतिम सांस ली। उनके पास संपत्ति के नाम पर केवल एक ‘ताम्रपत्र’ था, जो उन्हें उनके राष्ट्रीय योगदान के लिए मिला था।
केशभान राय जी का जीवन आज के राजनेताओं और युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ है। उनका ‘आनन्द विद्यापीठ’ आज भी उनकी स्मृतियों को जीवित रखे हुए है।













