लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने और आगामी चुनावों के लिए एक पारदर्शी नियमावली तैयार करने हेतु गोरखपुर के जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा स्वयं धरातल पर उतरे। रविवार को उन्होंने गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के तहत सभी बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रहे हैं या नहीं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि त्रुटिरहित मतदाता सूची बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही अक्षम्य होगी।
औचक निरीक्षण में क्या मिला?
जिलाधिकारी ने शहर के विभिन्न बूथों पर पहुँचकर सबसे पहले बीएलओ की उपस्थिति पंजिका (Attendance Register) की जांच की। उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत अब तक आए आवेदनों और उनके निस्तारण की प्रगति रिपोर्ट मांगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया:
- फार्म-6: नए मतदाताओं के पंजीकरण की स्थिति।
- फार्म-7: मृतक या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने (विलोपन) की प्रक्रिया।
- फार्म-8: नाम, आयु या फोटो में संशोधन के लिए आए आवेदनों की जांच।

कुछ स्थानों पर बीएलओ के अनुपस्थित मिलने पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने तत्काल उन कर्मचारियों को चिन्हित कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
डीएम की बीएलओ को सख्त हिदायत
दीपक मीणा ने बीएलओ को निर्देश देते हुए कहा कि केवल बूथ पर बैठना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें घर-घर जाकर सत्यापन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को सफल बनाने के लिए बीएलओ को सक्रिय होना होगा ताकि:
- कोई भी पात्र नागरिक (18 वर्ष पूर्ण करने वाला) सूची से बाहर न रहे।
- मृतक या बाहर चले गए लोगों के नाम हटाए जाएं।
- सूची पूरी तरह से शुद्ध और अद्यतन (Updated) रहे।
जनता से सीधा संवाद और अपील

निरीक्षण के दौरान डीएम ने मतदान केंद्रों पर आए नागरिकों से भी बात की। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपने नागरिक अधिकारों के प्रति सजग रहें और मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान का लाभ उठाएं। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपने विवरण की स्वयं जांच करें और किसी भी सुधार के लिए तुरंत बीएलओ से संपर्क कर आवेदन करें।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने दोहराया कि एक पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए शुद्ध मतदाता सूची का होना अनिवार्य है। प्रशासन हर स्तर पर इसकी निगरानी कर रहा है ताकि लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
निष्कर्ष: जवाबदेही तय करने की कवायद
जिलाधिकारी के इस कड़े रुख से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। इस औचक निरीक्षण ने यह संदेश साफ कर दिया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में ढिलाई बरतने वालों के लिए शासन में कोई जगह नहीं है। आने वाले दिनों में इस अभियान में और तेजी आने की उम्मीद है, जिससे गोरखपुर में एक त्रुटिरहित और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार हो सकेगी।
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