यह रिपोर्ट बृजनाथ तिवारी की लिखी हुई है
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में ‘छोटी अयोध्या’ के नाम से विख्यात गोला क्षेत्र रविवार, 18 जनवरी 2026 को भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के पावन अवसर पर सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और भोर की पहली किरण के साथ ही जय सरयू मैया के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के दिन मौन रहकर पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ शनिवार शाम से ही गोला के प्रमुख घाटों पर दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था।
सरयू घाटों पर पूजा-अर्चना और दान का महत्व
भोर होते ही सरयू नदी के गोला पक्का घाट, बेवरी श्याम घाट और हनुमानगढ़ी घाट समेत दर्जनों तटों पर स्नानार्थियों की लंबी कतारें लग गईं। मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) पर श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान के उपरांत विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आरती में भाग लिया। इस दिन गऊदान (गौदान) का विशेष महत्व बताया गया है, जिसके चलते कई श्रद्धालुओं ने तटों पर दान-पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
[Image Placeholder: सरयू नदी के तट पर स्नान करते हुए श्रद्धालुओं का दृश्य]
मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के इस अवसर पर गोला क्षेत्र के जिन प्रमुख घाटों पर सबसे अधिक भीड़ देखी गई, उनमें बारानगर, बिसरा, मौर्य घाट, रामामऊ, शिवपुर, तुर्कवलिया, बांहपुर, मेहड़ा, नरहन, भर्रोह एवं बरहज शामिल रहे। इन सभी स्थानों पर प्रशासन और स्वयंसेवकों की सक्रियता से स्नान कार्य शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।
पारंपरिक मेले में दिखी रौनक: सिंदूर, चूड़ी और लाई-गट्टा की धूम
स्नान और पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने उपनगर के प्रमुख चौराहों पर लगे पारंपरिक मेलों का भरपूर आनंद उठाया। मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के मेले में महिला श्रद्धालुओं ने परंपरा का निर्वहन करते हुए सुहाग के प्रतीक सिंदूर, चूड़ी और बिंदी की जमकर खरीदारी की।
- खान-पान का उत्साह: मेले में सबसे अधिक भीड़ लाई, चना और गट्टा की दुकानों पर रही। श्रद्धालुओं ने प्रसाद के रूप में इन पारंपरिक मिठाइयों को खरीदा।
- दुकानदारी: सरयू तट से लेकर नगर की मुख्य सड़कों के दोनों ओर सजी अस्थाई दुकानों पर देर शाम तक गहमागहमी बनी रही।
- सामुदायिक सहयोग: नगर पंचायत प्रशासन के साथ-साथ समाजसेवी शत्रुघ्न कसौधन, गिरधारी लाल स्वर्णकार और अशोक वर्मा जैसे स्थानीय लोग श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे।
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था: गोला पुलिस रही मुस्तैद
मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) पर उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए गोला पुलिस टीम पूरी तरह मुस्तैद नजर आई। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। गोताखोरों की टीम और जल पुलिस भी सरयू नदी में गश्त करती रही।
प्रशासन ने मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के मद्देनजर यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए थे ताकि पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। सफाई व्यवस्था को लेकर नगर पंचायत की टीमों ने निरंतर काम किया, जिससे घाटों की गरिमा बनी रही।
निष्कर्ष: श्रद्धा और संस्कृति का अनूठा मेल
18 जनवरी की यह मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) गोला क्षेत्र के लिए न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान रही, बल्कि इसने क्षेत्र की सांस्कृतिक और आर्थिक जीवंतता को भी प्रदर्शित किया। ‘छोटी अयोध्या’ के तटों पर आस्था की यह डुबकी यह बताती है कि आज के आधुनिक दौर में भी हमारी परंपराएं और विश्वास कितने अटूट हैं।
मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) का यह पर्व आपसी भाईचारे और सेवा भाव का भी प्रतीक बना, जहाँ समाज के हर वर्ग ने मिलकर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। सरयू की लहरों के साथ शुरू हुआ यह उत्सव मेलों की रौनक के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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