भारतीय सेना के गौरव और अदम्य साहस के प्रतीक शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा की पुण्यतिथि गोरखपुर में पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। यह अवसर केवल एक वीर सैनिक को याद करने का नहीं था, बल्कि समाज के प्रति सेवा और समर्पण के संकल्प को दोहराने का भी था। शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा के परिजनों ने उनकी स्मृति में अनाथ आश्रम पहुँचकर वहाँ रह रहे बच्चों की सेवा की और यह संदेश दिया कि एक सैनिक का बलिदान न केवल सीमाओं की रक्षा के लिए होता है, बल्कि उसकी विरासत समाज के कल्याण में भी जीवित रहती है।

आज जब पूरा देश अपनी सुरक्षा के लिए सेना के जवानों का ऋणी है, तब शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा जैसे योद्धाओं की गौरवगाथा हमें राष्ट्रवाद की सच्ची परिभाषा सिखाती है। उनके परिवार ने पिछले 18 वर्षों से उनकी पुण्यतिथि को सेवा दिवस के रूप में मनाने की जो परंपरा शुरू की है, वह आज गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है।
अनाथ आश्रम में सेवा और संकल्प: शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा के परिजनों की पहल

पुण्यतिथि के इस भावुक अवसर पर शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा के द्वितीय पुत्र सत्यजीत कुमार (सौरभ शर्मा) ने अपने पूरे परिवार के साथ अनाथ आश्रम का दौरा किया। उनके साथ उनकी पत्नी श्रीमती नीतू शर्मा, बच्चे अन्वी और प्रांशी, भाभी रंजना शर्मा और भतीजियाँ यशिका, अध्या व आराध्य शर्मा भी मौजूद रहीं। शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के बाद परिवार ने आश्रम के बच्चों के बीच समय बिताया।
परिजनों ने शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा की स्मृति में बच्चों को भोजन सामग्री और ठंड से बचाव के लिए कंबलों का वितरण किया। यह केवल एक दान नहीं था, बल्कि उन बच्चों के प्रति संवेदनशीलता थी जो समाज में अपनों की तलाश करते हैं। शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा के परिवार का मानना है कि इन मासूमों के चेहरों पर आने वाली मुस्कान ही शहीद के प्रति उनकी सच्ची श्रद्धांजलि है।
कौन थे शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा? अदम्य साहस और शहादत की कहानी
भारतीय सेना में सूबेदार मेजर के पद पर तैनात शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा अनुशासन और वीरता की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अपने सैन्य करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण अभियानों में हिस्सा लिया। वर्ष 2008 में जब वह जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में तैनात थे, तब देश की रक्षा करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा का वह सर्वोच्च बलिदान आज भी भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
उन्होंने उधमपुर की पहाड़ियों में दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया और अंतिम सांस तक तिरंगे की आन-बान-शान को बनाए रखा। शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा की वीरता ने न केवल उनके रेजिमेंट को गौरवान्वित किया, बल्कि उनके गृह जनपद गोरखपुर का नाम भी पूरे देश में रोशन किया। उनकी शहादत की कहानी आज भी नई पीढ़ी के युवाओं के भीतर देशभक्ति का जज्बा पैदा करती है।
18 वर्षों की निरंतर सेवा: शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा की विरासत
आमतौर पर पुण्यतिथि पर लोग हवन-पूजन या औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा का परिवार इसे मानवता की सेवा के अवसर के रूप में देखता है। पिछले 18 वर्षों से लगातार, बिना किसी रुकावट के, शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा की पुण्यतिथि इसी तरह जरूरतमंदों की सहायता करते हुए मनाई जा रही है।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा ने हमेशा सिखाया था कि समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद करना ही सबसे बड़ी पूजा है। इसी शिक्षा को आत्मसात करते हुए, वे हर वर्ष अनाथ बच्चों, विधवाओं और असहाय लोगों के बीच जाते हैं। शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा के नाम पर होने वाला यह सेवा कार्य यह दर्शाता है कि एक शहीद कभी मरता नहीं है, बल्कि वह समाज के कल्याणकारी कार्यों में हमेशा जीवित रहता है।
समाज के लिए प्रेरणा: शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा का सेवा संदेश
इस गरिमामयी कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा के परिजनों के प्रयासों की भूरी-भूरी सराहना की। लोगों का कहना था कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहाँ लोग अपनों को भूल जाते हैं, वहीं शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा के परिवार का यह सेवा भाव एक मिसाल है। ऐसे आयोजनों से समाज में भाईचारा बढ़ता है और लोगों को राष्ट्र सेवा के प्रति नई ऊर्जा मिलती है।
शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा की पुण्यतिथि पर वितरित की गई भोजन सामग्री और अन्य उपहारों ने बच्चों के मन में सुरक्षा और प्रेम की भावना जगाई। उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा को नमन किया और उनके दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष: अमर रहे शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा
अंततः, शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा की पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम हमें यह याद दिलाता है कि वीर सैनिकों का ऋण हम कभी नहीं उतार सकते, लेकिन उनके पदचिन्हों पर चलकर समाज को बेहतर जरूर बना सकते हैं। गोरखपुर की धरती के वीर सपूत शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा का बलिदान और उनके परिवार का सेवा भाव, दोनों ही वंदनीय हैं।
जब तक इस देश में शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा जैसे योद्धाओं की यादें ताजा हैं और उनके परिवार जैसे लोग समाज की सेवा के लिए तत्पर हैं, तब तक हमारी राष्ट्रभक्ति की जड़ें मजबूत रहेंगी। शहीद कलेक्टर प्रसाद शर्मा को उनकी पुण्यतिथि पर शत-शत नमन। उनकी वीरता और सेवा का यह संगम आने वाली सदियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।














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